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वन विभाग की भूमि पर रेस्टोरेंट खोलने वाली प्रियंका शर्मा को सुप्रीम कोर्ट का आदेश

ग्वालियर। वन विभाग के जंगलों का महत्व मानव जीवन में अद्वितीय होता है, लेकिन कुछ अनैतिक तत्वों ने वन विभाग की बेहतरीन जमीनों का अवैध कब्जा कर वाणिज्यिक उपयोग किया है। घाटीगांव थानान्तर्गत ग्राम दोरार में, सर्वे क्रमांक 1221/1 की वन विभाग की भूमि पर मधुबन नामक रेस्टोरेंट का उद्घाटन किया गया है, जिसके मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय दिया है।

वन विभाग के उच्चाधिकारियों के अनुसार, इस जमीन पर पहले किसान मुन्नालाल गुप्ता का नाम था, जिसे वन विभाग ने 2013 में मुआवजा देकर अपने नाम कर लिया था। परंतु बाद में पूर्व थाना प्रभारी विनय शर्मा ने इस जमीन का डायवर्सन कर अपनी पत्नी प्रियंका शर्मा के नाम पर करा लिया। इसके बाद उन्होंने यहां मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घोषित वन भूमि के विकास के लिए अवैध रूप से रेस्टोरेंट खोला।

इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने संलग्न अधिकारियों के संदर्भ में संज्ञान लेते हुए, यह निर्णय लिया कि वन विभाग की भूमि का वाणिज्यिक उपयोग अवैध है। हाईकोर्ट में इस मामले को खारिज कर दिया गया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसके खिलाफ आपील दर्ज की और निर्णय दिया कि जमीन को वन विभाग की भूमि माना जाए।

अब वन विभाग को इस जमीन को मुक्त करने की कार्रवाई करनी होगी, ताकि जंगल की रक्षा और विकास में विशेषज्ञता से लाभ पहुंचाया जा सके। इस मामले में वन विभाग के अधिकारी भी विवाद में संलिप्त होने के संकेत हैं, जिसका गहरा संदेश है कि संघर्ष करने वाले तत्वों के खिलाफ सुशासन के अनुशासन का पालन किया जाना चाहिए।

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