PWD टेंडर विवाद: बिल भुगतान के लिए ‘प्रदीप राय सर्टिफिकेट’ जरूरी? छतरपुर में ठेकेदारों का फूटा गुस्सा

PWD में टेंडर और भुगतान व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, ठेकेदारों ने लगाया पक्षपात और फर्जी दस्तावेजों का आरोप
मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में इन दिनों टेंडर आवंटन और बिल भुगतान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छतरपुर जिले में ठेकेदारों ने विभाग के प्रमुख अभियंता (ENC) पी.एस. राणा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अब विभाग में काम का भुगतान नियमों से नहीं बल्कि “वफादारी” के आधार पर हो रहा है। आरोप है कि ENC के कथित करीबी और बाल सखा प्रदीप राय का विरोध करने वाले ठेकेदारों के बिल रोक दिए गए हैं, जबकि समर्थकों को भुगतान प्राथमिकता से किया जा रहा है।
5.27 करोड़ के सड़क टेंडर से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला छतरपुर से रजपुरा-पाथापुर मार्ग निर्माण कार्य के 5.27 करोड़ रुपये के टेंडर से जुड़ा है। यह टेंडर आईडी 2025-PWDRB-4516-1 के अंतर्गत जारी किया गया था। स्थानीय ठेकेदारों का आरोप है कि मेसर्स गिर्राज कंस्ट्रक्शन/गिर्राज इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी को नियमों की अनदेखी कर यह ठेका दिया गया।
कांट्रेक्टर एसोसिएशन का दावा है कि टेंडर की अनिवार्य शर्तों के अनुसार ठेकेदार के पास खुद की जेसीबी, टैंडम रोलर और मोटर ग्रेडर होना जरूरी था। लेकिन गिर्राज कंपनी के पास आवश्यक मशीनरी उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद कंपनी को टेंडर प्रदान कर दिया गया।
फर्जी बिल और मशीनरी दस्तावेजों का आरोप
छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि गिर्राज कंपनी ने मशीनरी उपलब्ध होने के प्रमाण के तौर पर फर्जी दस्तावेज लगाए। शिकायत में कहा गया कि कंपनी ने रियान इन्फ्रासोल्यूशन के नाम से टैंडम रोलर खरीदने का इनवॉइस प्रस्तुत किया, जिसका नंबर 112517 बताया गया। लेकिन बाद में संबंधित कंपनी ने लिखित में स्पष्ट कर दिया कि उसने गिर्राज कंपनी को कोई टैंडम रोलर बेचा ही नहीं।
इसी प्रकार मोटर ग्रेडर के मामले में भी कथित गड़बड़ी सामने आई। शिकायत के अनुसार टेंडर में RTO नंबर MP 16DA0382 दर्ज किया गया, जबकि रिकॉर्ड में यह नंबर मिनी ग्रेडर BS-III का निकला। दस्तावेजों में मॉडल S-3218 मिनी ग्रेडर बताया गया, जिसे एसोसिएशन ने नियमों के विपरीत बताया है।
“तकनीकी कमी” बताकर अन्य कंपनियों को बाहर करने का आरोप
स्थानीय ठेकेदारों का आरोप है कि कई पात्र कंपनियों को मामूली तकनीकी कमियों का हवाला देकर टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जबकि कथित फर्जी दस्तावेजों वाली कंपनी को पात्र घोषित कर ठेका दे दिया गया। इस पूरे मामले की शिकायत ENC पी.एस. राणा, विभागीय प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाई गई।
हालांकि शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय जांच उसी अधिकारी को सौंप दी गई जिसने टेंडर की सिफारिश की थी। इससे विभागीय निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
“विरोध किया तो बिल गया” – ठेकेदारों का आरोप
छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन से जुड़े ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने विभागीय अनियमितताओं का विरोध किया, जिसके बाद उनके भुगतान रोक दिए गए। आरोप है कि छतरपुर के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर आशीष भारती ने स्पष्ट कह दिया कि भुगतान उन्हीं को होगा जिनके नाम प्रदीप राय की ओर से भेजे जाएंगे।
ठेकेदारों का दावा है कि विभाग से भुगतान राशि जारी होकर जिला कार्यालय तक पहुंच चुकी है, लेकिन फाइलें जानबूझकर रोकी जा रही हैं। इससे कई निर्माण एजेंसियों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन गई है।
PWD में “राय दरबार” चलने का आरोप
विवाद अब केवल एक टेंडर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे PWD सिस्टम पर सवाल खड़े होने लगे हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि विभाग में अब “पहले वफादारी, फिर भुगतान” का नया सिस्टम लागू हो गया है। उनका कहना है कि यदि किसी ठेकेदार ने प्रदीप राय का विरोध किया तो उसके बिल अटकना तय माना जा रहा है।
एसोसिएशन का आरोप है कि PWD मुख्यालय से लेकर जिला कार्यालय तक भुगतान प्रक्रिया पर कथित रूप से “राणा-राय गठबंधन” का प्रभाव है। इससे विभाग की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आंदोलन की चेतावनी, काम बंद करने की तैयारी
प्रदीप राय का विरोध कर रहे ठेकेदार अब आंदोलन की तैयारी में हैं। छतरपुर कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि विरोधी ठेकेदारों को प्रताड़ित किया गया और बिल भुगतान नहीं हुआ तो जिले में निर्माण कार्य ठप कर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने सरकार के विकास कार्य ईमानदारी से पूरे किए हैं, ऐसे में भुगतान के लिए किसी व्यक्ति विशेष की “सिफारिश” की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। एसोसिएशन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
PWD विवाद बना राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय
PWD में टेंडर आवंटन, फर्जी दस्तावेज और भुगतान रोकने के आरोप अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुके हैं। विभागीय पारदर्शिता, ई-टेंडरिंग प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार और विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और शिकायतों की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं।





