एम्स भोपाल में गंभीर कुपोषण प्रबंधन पर चार दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित, बच्चों के पोषण पुनर्वास पर दिया गया विशेष जोर

AIIMS Bhopal News: SAM प्रबंधन और पोषण पुनर्वास पर विशेषज्ञों ने साझा की व्यवहारिक जानकारी
AIIMS Bhopal के शिशु रोग विभाग द्वारा बच्चों में गंभीर कुपोषण की समस्या से निपटने के उद्देश्य से “गंभीर तीव्र कुपोषण (SAM) का सुविधा-आधारित प्रबंधन” विषय पर चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण 11 से 14 मई 2026 तक पोषण पुनर्वास संसाधन एवं प्रशिक्षण के लिए क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (RCoENRRT) के माध्यम से आयोजित किया गया, जिसमें मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
कुपोषण प्रबंधन को मजबूत बनाने की दिशा में पहल
एम्स भोपाल लगातार चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ जनस्वास्थ्य और पोषण से जुड़े विषयों पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम चला रहा है। इसी कड़ी में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों और मास्टर ट्रेनर्स को गंभीर कुपोषण से ग्रसित बच्चों की पहचान, उपचार और पोषण पुनर्वास की व्यवहारिक जानकारी प्रदान करना था।
कार्यक्रम में शिशु रोग विभाग की विभागाध्यक्ष एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की नोडल अधिकारी प्रो. (डॉ.) शिखा मलिक और मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की प्रोफेसर एवं प्रभारी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) भावना ढींगरा ने विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र लिए। दोनों विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को गंभीर तीव्र कुपोषण (Severe Acute Malnutrition – SAM) से पीड़ित बच्चों के प्रबंधन, चिकित्सीय देखभाल और पोषण पुनर्वास से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की।
बच्चों के वजन की नियमित निगरानी पर जोर
प्रो. (डॉ.) शिखा मलिक ने प्रशिक्षण के दौरान बच्चों के नियमित वजन परीक्षण और स्वास्थ्य निगरानी के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों का वजन लंबे समय तक कम बना रहता है, तो इसका सीधा असर उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ता है। कई मामलों में गंभीर कुपोषण बच्चों के जीवन के लिए भी खतरा बन सकता है।
उन्होंने बताया कि समय रहते सही पहचान और पोषण आधारित उपचार से बच्चों को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाया जा सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्यकर्मियों को SAM प्रबंधन के लिए व्यवहारिक प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है।
उपचारात्मक आहार तैयार करने का व्यावहारिक प्रदर्शन
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि बच्चों के लिए उपचारात्मक आहार (Therapeutic Diet) तैयार करने का लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी कराया गया। सुश्री निधि रघुवंशी और सुश्री जयश्री लोखंडे द्वारा गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों के लिए उपयुक्त पोषण आहार तैयार करने की विधियों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।
इस सत्र में प्रतिभागियों को यह बताया गया कि किस प्रकार कम संसाधनों में भी पौष्टिक और चिकित्सीय रूप से प्रभावी आहार तैयार कर बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार किया जा सकता है।
मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे प्रतिभागी
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के कई जिलों से स्वास्थ्य विभाग से जुड़े प्रतिनिधि, मास्टर ट्रेनर्स और चिकित्सा कर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन डॉ. इन्द्रेश कुमार, प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर द्वारा किया गया। वहीं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश की ओर से डॉ. विनीता मेवाड़ा और श्री सौरभ गौर भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी, व्यवहारिक और जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों के कुपोषण प्रबंधन को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
बच्चों में कुपोषण रोकने के लिए जागरूकता जरूरी
विशेषज्ञों ने कहा कि गंभीर कुपोषण केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं बल्कि सामाजिक और जनस्वास्थ्य की बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए समुदाय स्तर पर जागरूकता, नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप बेहद आवश्यक हैं।
एम्स भोपाल द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, बल्कि बच्चों में कुपोषण की रोकथाम और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी प्रभावी पहल माना जा रहा है।





