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हैदराबाद में ‘काव्यधारा’ की साहित्यिक संगोष्ठी, काव्यपाठ और पांच पुस्तकों का लोकार्पण

भोपाल/हैदराबाद। हैदराबाद में ‘काव्यधारा’ संस्था के तत्वावधान में साहित्यिक संगोष्ठी एवं काव्यपाठ का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समकालीन साहित्य के विभिन्न आयामों पर चर्चा और देशभर के साहित्यकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना था। आयोजन संस्था की मार्गदर्शक सुनीता के नेतृत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसे कवयित्री नेमा रवि ने प्रस्तुत किया।

संगोष्ठी दो सत्रों में आयोजित की गई। पहले सत्र का संचालन वर्षा शर्मा और गीता अग्रवाल ने, जबकि दूसरे सत्र का संचालन डॉ. प्रतिभा गर्ग एवं रचना चतुर्वेदी ने किया। मुख्य वक्ता विज्ञान व्रत ने कहा कि काव्य की भाषा सरल और सहज होनी चाहिए, ताकि वह सीधे पाठकों के हृदय तक पहुँच सके।

अध्यक्षीय उद्बोधन में ऋषभदेव शर्मा ने काव्य-शिल्प, भाषा और अभिव्यक्ति की बारीकियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सत्यप्रसन्न और वरिष्ठ साहित्यकार विनीता की उपस्थिति भी विशेष आकर्षण रही। विनीता के काव्यपाठ को श्रोताओं ने खूब सराहा।

काव्यपाठ सत्र में दोहा, गीत, ग़ज़ल, नवगीत और छंदमुक्त कविताओं की प्रस्तुतियां हुईं। विज्ञान व्रत, डॉ. प्रतिभा गर्ग, गीता अग्रवाल, वर्षा शर्मा, ऋता शुक्ला और रचना चतुर्वेदी सहित कई रचनाकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

इस अवसर पर पांच पुस्तकों—’खुशबू-ए-सुख़न’, ‘मानसी’, ‘उड़ जाने दो’, ‘सूर्य निकलता रोज़ाना’ और ‘आस-पास परिहास’—का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम के उत्तरार्ध में के.पी. अग्रवाल, राजीव, ताजम्मुल फ़ातिमा, विनोद गिरी, आरजू महक, प्रह्लाद जोशी, मनोरमा शर्मा और बैजनाथ सुनहरे सहित अनेक साहित्यकारों ने काव्यपाठ किया।

समापन पर संस्था की मुख्य आयोजक सुनीता ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए हिंदी भाषा और साहित्य के संवर्धन के लिए ऐसे आयोजन निरंतर करते रहने का संकल्प व्यक्त किया।

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