राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: मध्यप्रदेश में बन रहे तीन क्राफ्ट हैंडलूम टूरिज्म विलेज, देश के लिए बन रहा मॉडल

भोपाल। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश अपनी समृद्ध हथकरघा परंपरा और ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। राज्य में तीन क्राफ्ट हैंडलूम टूरिज्म विलेज विकसित किए जा रहे हैं, जिससे मध्यप्रदेश इस तरह की पहल करने वाला देश का पहला राज्य बनने की ओर अग्रसर है।
मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अनुसार, चंदेरी के पास स्थित प्राणपुर देश का पहला क्राफ्ट हैंडलूम टूरिज्म विलेज है। इसकी सफलता के बाद अब महेश्वर के केरियाखेड़ी में माहेश्वरी बुनाई और धार जिले के कुक्षी में बाग प्रिंट पर आधारित नए क्राफ्ट विलेज विकसित किए जा रहे हैं।
प्राणपुर को वर्ष 2024 में पर्यटन मंत्रालय द्वारा ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था। राज्य सरकार का कहना है कि इस मॉडल की सराहना केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने भी की है और अन्य राज्यों को इसे अपनाने की सलाह दी गई है।
सैकड़ों परिवारों को मिल रहा रोजगार
चंदेरी के प्राणपुर में करीब 450 बुनकर परिवार पारंपरिक पिट लूम पर चंदेरी साड़ियों की बुनाई करते हैं। वहीं महेश्वर के केरियाखेड़ी में 125 बुनकर हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं। सूत तैयार करने, रंगाई, बुनाई, डिजाइनिंग और फिनिशिंग जैसे कार्यों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस उद्योग को मजबूत बना रही है।
महेश्वर में टेक्सटाइल टूरिज्म को बढ़ावा
महेश्वर में पर्यटन विभाग और वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से 5.11 करोड़ रुपये की लागत से टेक्सटाइल विलेज विकसित किया जा रहा है। परियोजना के तहत होम-स्टे, कैफेटेरिया, ट्रैकिंग मार्ग और घाट विकास जैसे कार्य किए जा रहे हैं। यहां आने वाले पर्यटक माहेश्वरी साड़ी की बुनाई को करीब से देख सकेंगे और सीधे बुनकरों से हस्तनिर्मित उत्पाद खरीद सकेंगे।
बुनकरों को मिल रहा सीधा लाभ
चंदेरी और महेश्वर के बाजार अब पर्यटन का भी प्रमुख आकर्षण बन चुके हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक सीधे बुनकरों और सहकारी समितियों से खरीदारी कर रहे हैं। इससे बुनकरों को बेहतर मूल्य मिल रहा है, बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
राज्य सरकार का मानना है कि हथकरघा और पर्यटन का यह मॉडल न केवल पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करेगा, बल्कि ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा।





