सोशल इम्पैक्ट बॉण्ड लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना मध्यप्रदेश

ओबीसी के 600 युवाओं को जापान और जर्मनी में रोजगार के लिए मिलेगा कौशल प्रशिक्षण, एनएसई मुंबई में हुआ समझौता
भोपाल, 22 अक्टूबर। मध्यप्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के युवाओं को विदेश में रोजगार दिलाने के लिए सोशल इम्पैक्ट बॉण्ड की पहल की है। सरकार के अनुसार, इस मॉडल को लागू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है। इसके तहत प्रदेश के 600 युवाओं को जापान और जर्मनी में रोजगार के लिए कौशल प्रशिक्षण और संबंधित देशों की भाषा सिखाई जाएगी।
मुंबई स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) परिसर में गुरुवार को इस परियोजना की लिस्टिंग, बेल-रिंगिंग समारोह और त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। प्रदेश की पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने इसे युवाओं के कौशल विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
जापान और जर्मनी जाएंगे 600 युवा
राज्यमंत्री कृष्णा गौर के अनुसार, योजना के तहत 300 युवाओं को जापान और 300 युवाओं को जर्मनी में रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा। युवाओं को आवासीय प्रशिक्षण देने के साथ संबंधित देश की भाषा और जरूरी व्यावसायिक कौशल सिखाए जाएंगे। इससे उन्हें विदेश में रोजगार पाने और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
इस परियोजना को मध्यप्रदेश शासन के पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी), नाबार्ड और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के समन्वय से आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रशिक्षण की 50 प्रतिशत राशि सरकार देगी
योजना के तहत प्रशिक्षण का खर्च तीन हिस्सों में बांटा गया है। कुल प्रशिक्षण शुल्क का 50 प्रतिशत मध्यप्रदेश सरकार, 35 प्रतिशत सोशल इम्पैक्ट बॉण्ड के माध्यम से और शेष 15 प्रतिशत राशि संबंधित युवा वहन करेगा।
इस वित्तीय मॉडल में सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर पंजीकृत जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए पारदर्शी तरीके से वित्तीय संसाधन जुटाना है।
रोजगार मिलने पर ही होगा भुगतान
योजना में परिणाम के आधार पर भुगतान की व्यवस्था की गई है। इसके तहत स्वतंत्र एजेंसी युवाओं को दिए गए प्रशिक्षण और योजना के सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन करेगी। सरकार के अनुसार, सकारात्मक मूल्यांकन रिपोर्ट मिलने और संबंधित युवा को विदेश में रोजगार मिलने के बाद ही राज्य सरकार एनएसडीसी को अपनी निर्धारित 50 प्रतिशत राशि का भुगतान करेगी।
यदि तय परिणाम हासिल नहीं होते हैं, तो सरकार पर यह भुगतान करने का वित्तीय दायित्व नहीं होगा। ऐसी स्थिति में वित्तीय जोखिम एनएसडीसी उठाएगा।
सरकार का कहना है कि इस पहल से पिछड़ा वर्ग के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही, कौशल विकास योजनाओं में खर्च को रोजगार जैसे वास्तविक परिणामों से जोड़ने की व्यवस्था मजबूत होगी।





