State

भोपाल नगर निगम में पदोन्नति पर घमासान: एमआईसी, महापौर और निगमायुक्त के बीच तीखी बहस, 638 में सिर्फ 17 को मिली पदोन्नति

भोपाल, 15 जुलाई। भोपाल नगर निगम में कर्मचारियों और अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर बुधवार देर शाम तक चली एमआईसी (महापौर परिषद) की बैठक विवादों में रही। करीब तीन घंटे तक चली बैठक में पदोन्नति के मुद्दे पर महापौर मालती राय, एमआईसी सदस्यों और निगमायुक्त संस्कृति जैन के बीच तीखी बहस हुई।

बैठक में कुल 638 पात्र कर्मचारियों और अधिकारियों के मामलों पर चर्चा हुई, लेकिन अंततः सिर्फ 17 अधिकारियों की पदोन्नति पर सहमति बन सकी। इनमें प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं, जबकि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के 621 कर्मचारियों और अधिकारियों की पदोन्नति लंबित शिकायतों का हवाला देते हुए फिलहाल रोक दी गई।

14 इंजीनियर और 3 स्वास्थ्य अधिकारियों को मिला प्रमोशन

बैठक में 14 इंजीनियरों को पदोन्नति देने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा दो सहायक स्वास्थ्य अधिकारी राजीव सक्सेना और सुमनधर शर्मा तथा आरक्षित वर्ग से पवन मेहरा को स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया।

जांच बाद में हो, पहले पदोन्नति मिले: जनप्रतिनिधियों का पक्ष

बैठक के दौरान एमआईसी सदस्यों और महापौर का मत था कि जिन कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें लंबित हैं, उनकी जांच प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है। उनका तर्क था कि जब तक कोई कर्मचारी दोषी सिद्ध नहीं होता, तब तक उसकी पदोन्नति नहीं रोकी जानी चाहिए। जनप्रतिनिधियों ने यह सवाल भी उठाया कि कई मामलों की जांच लंबे समय से लंबित क्यों रखी गई है।

निगमायुक्त का रुख

वहीं निगमायुक्त संस्कृति जैन ने स्पष्ट किया कि जिन कर्मचारियों के विरुद्ध जांच या शिकायतें लंबित हैं, उन्हें नियमों के अनुसार पदोन्नति नहीं दी जा सकती। इसी मुद्दे पर बैठक में दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और माहौल गर्म हो गया।

शिकायत का निराकरण होने के बाद भी कई कर्मचारी वंचित!

सूत्रों के अनुसार कुछ ऐसे कर्मचारी भी पदोन्नति सूची से बाहर रह गए, जिनकी शिकायतों का पहले ही निराकरण हो चुका था और वे जांच में निर्दोष पाए गए थे। इसके बावजूद पात्र होने के बाद भी उनके नाम पदोन्नति सूची में शामिल नहीं किए गए। यदि यह दावा सही है, तो ऐसे मामलों की समीक्षा की मांग तेज हो सकती है।

«नोट: कर्मचारियों की शिकायतों के निराकरण और पदोन्नति से वंचित रहने संबंधी दावे संबंधित सूत्रों के हवाले से सामने आए हैं। इन दावों पर नगर निगम का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

Related Articles