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एनएबीएच गुणवत्ता यात्रा सम्पन्न: 227 अस्पतालों के 500 स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सीखे गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा के मानक

भोपाल। मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के राष्ट्रीय अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड (NABH) द्वारा आयोजित ‘एनएबीएच गुणवत्ता यात्रा’ का भोपाल में समापन हो गया। 6 से 14 जुलाई के बीच आयोजित पांच जागरूकता सत्रों में प्रदेश के 227 अस्पतालों के प्रतिनिधियों और करीब 500 स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लेकर गुणवत्ता मानकों, रोगी सुरक्षा और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

समापन सत्र में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा, जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. कामिनी मेहरा, चिरायु मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. अजय गोयनका, हजेला अस्पताल के संस्थापक डॉ. अनूप हजेला तथा जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल की एनएबीएच प्रधान निर्धारक डॉ. दीप्ति चंद्रा शर्मा उपस्थित रहीं।

एनएबीएच गुणवत्ता सुधार का प्रभावी माध्यम

डॉ. अजय गोयनका ने कहा कि एनएबीएच के मानक अस्पतालों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। इनके पालन से रोगी सुरक्षा मजबूत होती है, उपचार की गुणवत्ता में सुधार आता है और अस्पतालों की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनती है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि आज के समय में एनएबीएच केवल एक प्रमाणन नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने अस्पतालों से एंट्री लेवल प्रमाणन और पूर्ण प्रत्यायन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही बताया कि भोपाल में पेपरलेस स्वास्थ्य व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है।

डॉ. अनूप हजेला ने कहा कि प्रभावी संवाद, सटीक दस्तावेजीकरण और उच्च जोखिम वाले मामलों में व्यवस्थित सहमति प्रक्रिया गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव है। उनके अनुसार एनएबीएच अस्पतालों के लिए अतिरिक्त बोझ नहीं, बल्कि गुणवत्ता सुधार का सहयोगी तंत्र है।

गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाएं ही सुरक्षित उपचार की आधारशिला

जिला महामारी विशेषज्ञ डॉ. कामिनी मेहरा ने अस्पतालों से शीघ्र एनएबीएच प्रमाणन और प्रत्यायन प्राप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता कोई विकल्प नहीं, बल्कि रोगी सुरक्षा की आधारशिला है। मानकीकृत प्रोटोकॉल, प्रभावी संक्रमण नियंत्रण और आंकड़ों पर आधारित निर्णय प्रणाली उपचार परिणामों को बेहतर बनाने के साथ अस्पताल-जनित संक्रमण और चिकित्सकीय त्रुटियों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) और एनएबीएच द्वारा गुणवत्ता संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

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