जनगणना-2027 की रफ्तार तेज: भोपाल में 6.5 लाख से अधिक मकानों का सूचीकरण पूरा, डिजिटल डेटा से बदलेगी शहरी योजना

भारत की आगामी Census of India 2027 केवल जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि आने वाले वर्षों की शहरी योजना, संसाधन वितरण और सरकारी नीतियों की बुनियाद तय करने वाली कवायद मानी जा रही है। इसी क्रम में भोपाल नगर निगम क्षेत्र में मकान सूचीकरण का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक 6 लाख 50 हजार से अधिक मकानों की गणना पूरी की जा चुकी है, जबकि 3,284 गणना ब्लॉकों में से लगभग 1,600 ब्लॉकों का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
Sanskriti Jain ने जनगणना कार्य में विशेष योगदान देने वाले अधिकारियों और सुपरवाइजर्स को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। प्रशासनिक स्तर पर इसे केवल औपचारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है मकान सूचीकरण?
जनगणना का पहला चरण, जिसे “हाउस लिस्टिंग” या मकान सूचीकरण कहा जाता है, भविष्य की पूरी जनगणना प्रक्रिया की आधारशिला होता है। इसमें केवल घरों की संख्या नहीं गिनी जाती, बल्कि आवासीय स्थिति, बुनियादी सुविधाएं, जल स्रोत, शौचालय, बिजली, इंटरनेट और सामाजिक-आर्थिक संकेतकों से जुड़ी जानकारी भी एकत्र की जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यही डेटा आगे चलकर—
शहरी विकास योजनाओं
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
जल और सीवेज नेटवर्क
परिवहन व्यवस्था
स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे
और गरीब कल्याण योजनाओं
की दिशा तय करने में उपयोग होता है।
तेजी से फैलते शहरों के लिए क्यों अहम है यह प्रक्रिया?
भोपाल जैसे शहर पिछले एक दशक में तेजी से विस्तार कर रहे हैं। नई कॉलोनियां, बहुमंजिला आवास, अनौपचारिक बस्तियां और परिधीय विकास प्रशासन के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। ऐसे में सटीक जनगणना डेटा के बिना शहरी योजना अधूरी मानी जाती है।
शहरी मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार शहरों की वास्तविक आबादी सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो जाती है, जिससे पानी, बिजली, सड़क और सार्वजनिक परिवहन जैसी सेवाओं पर दबाव बढ़ता है। जनगणना इसी अंतर को समझने का सबसे बड़ा माध्यम होती है।
डिजिटल जनगणना की ओर बढ़ता भारत
इस बार की जनगणना प्रक्रिया को तकनीकी रूप से अधिक उन्नत माना जा रहा है। सरकार डिजिटल डेटा संग्रहण, मोबाइल एप आधारित एंट्री और रियल टाइम मॉनिटरिंग पर जोर दे रही है। इससे डेटा की सटीकता बढ़ने के साथ-साथ विश्लेषण की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।
भोपाल में भी अधिकारियों और मास्टर ट्रेनर्स द्वारा लगातार फील्ड मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार कई प्रगणकों ने निर्धारित समय से पहले अपना कार्य पूरा कर लिया है, जबकि लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
सम्मान और जवाबदेही दोनों पर जोर
Sanskriti Jain द्वारा चार्ज अधिकारियों, सुपरवाइजर्स और प्रगणकों को सम्मानित किया जाना प्रशासनिक प्रोत्साहन का हिस्सा माना जा रहा है।
सम्मानित अधिकारियों में Vikram Jha, Rajendra Ahirwar और Shubham Patel सहित कई सुपरवाइजर्स शामिल रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना जैसे बड़े राष्ट्रीय कार्य में केवल आदेश आधारित व्यवस्था पर्याप्त नहीं होती। जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की प्रेरणा, प्रशिक्षण और निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
जनगणना और भविष्य की राजनीति
भारत में जनगणना का महत्व केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक भी होता है। कई सरकारी योजनाओं का बजट, संसाधनों का वितरण और भविष्य में निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन जैसे मुद्दे भी जनगणना आंकड़ों से प्रभावित होते हैं।
यही कारण है कि 2027 की जनगणना को नीति निर्माण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद यह पहली व्यापक राष्ट्रीय जनगणना होगी, इसलिए इससे देश के बदलते सामाजिक और आर्थिक स्वरूप की नई तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।




