

Bhopal । All India Institute of Medical Sciences Bhopal की एम.एससी. नर्सिंग छात्रा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर मातृ स्वास्थ्य से जुड़े ऐसे विषय को उठाया है, जिसे अब आधुनिक चिकित्सा विज्ञान केवल भावनात्मक नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखने लगा है।
एम्स भोपाल की 2023 बैच की छात्रा Priya Kumari ने चीन की राजधानी Beijing में आयोजित “ASPIRE 2026” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु के भावनात्मक जुड़ाव पर आधारित शोध प्रस्तुत किया। यह सम्मेलन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रजनन और मातृ स्वास्थ्य के सबसे प्रमुख वैज्ञानिक आयोजनों में माना जाता है, जिसमें 60 से अधिक देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध?
भारत सहित कई विकासशील देशों में मातृ स्वास्थ्य पर चर्चा अक्सर पोषण, एनीमिया, प्रसव और मृत्यु दर तक सीमित रह जाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्वास्थ्य संस्थानों ने “मातृ-भ्रूण भावनात्मक जुड़ाव” (Maternal-Fetal Attachment) को भी स्वस्थ गर्भावस्था का महत्वपूर्ण पहलू माना है।
विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान मां की मानसिक स्थिति, संवाद, सकारात्मक व्यवहार और भावनात्मक सहभागिता का असर केवल महिला के मानसिक स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि नवजात के शुरुआती विकास पर भी पड़ सकता है।
Priya Kumari के शोध का विषय था —
“गर्भवती महिलाओं में भ्रूण केंद्रित मातृ गतिविधियों का मातृ-भ्रूण लगाव पर प्रभाव”।
इस अध्ययन में यह समझने का प्रयास किया गया कि गर्भावस्था के दौरान अपनाई गई सकारात्मक गतिविधियां किस तरह गर्भस्थ शिशु के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत बना सकती हैं।
मातृ स्वास्थ्य में बदलता वैश्विक दृष्टिकोण
विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब मातृ स्वास्थ्य को केवल “बीमारी और उपचार” के दायरे में नहीं देखते। आधुनिक चिकित्सा में मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिरता और प्रसव पूर्व देखभाल को भी समान महत्व दिया जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि—
तनावमुक्त गर्भावस्था
परिवार का सहयोग
सकारात्मक संवाद
और मानसिक स्वास्थ्य समर्थन
नवजात के शुरुआती विकास और मां के आत्मविश्वास को बेहतर बना सकते हैं।
इसी कारण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में अब नर्सिंग रिसर्च की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि नर्सिंग पेशा सीधे मातृ देखभाल और व्यवहारिक स्वास्थ्य से जुड़ा होता है।
AIIMS Bhopal के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
All India Institute of Medical Sciences Bhopal पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। संस्थान अब केवल उपचार केंद्र नहीं, बल्कि रिसर्च और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति से जुड़े अकादमिक केंद्र के रूप में भी उभर रहा है।
संस्थान के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ Madhavanand Kar के नेतृत्व में विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय शोध मंचों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारतीय नर्सिंग शोध को लंबे समय तक वैश्विक मंचों पर सीमित प्रतिनिधित्व मिलता रहा है। अब भारतीय संस्थानों की भागीदारी बढ़ने से स्थानीय स्वास्थ्य चुनौतियों को अंतरराष्ट्रीय विमर्श में जगह मिल रही है।
शोध में मार्गदर्शन और अकादमिक सहयोग
यह शोध कार्य Lily Poddar, Kumarasamy A. P. और K. Pushpalata के मार्गदर्शन में पूरा किया गया।
नर्सिंग कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य Mamta Verma सहित संकाय सदस्यों ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गौरवपूर्ण बताया है।
भविष्य में क्या असर पड़ सकता है?
स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों में यदि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को अधिक व्यवस्थित रूप से शामिल किया जाए, तो प्रसव पूर्व देखभाल की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
आने वाले वर्षों में इस तरह के शोध—
हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के प्रबंधन,
प्रसव पूर्व काउंसलिंग,
और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों
के डिजाइन में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
ऐसे समय में जब भारत मातृ मृत्यु दर कम करने और महिलाओं के स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार पर काम कर रहा है, तब नर्सिंग आधारित शोधों का वैश्विक मंचों तक पहुंचना चिकित्सा शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।


