
भोपाल । डिजिटल दौर में मोबाइल फोन अब केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि बैंकिंग, पहचान, निजी डेटा और रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। ऐसे में मोबाइल गुम होना या चोरी होना आम नागरिक के लिए आर्थिक नुकसान के साथ गंभीर साइबर जोखिम भी पैदा करता है। इसी बीच Bhopal Police की Hanumanganj Police Station ने CEIR पोर्टल की मदद से लगभग 12 लाख रुपये कीमत के 50 गुम मोबाइल फोन बरामद करने में सफलता हासिल की है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केवल संपत्ति बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और साइबर निगरानी प्रणाली की बढ़ती प्रभावशीलता का भी संकेत है।
क्या है CEIR पोर्टल और क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया Central Equipment Identity Register यानी CEIR पोर्टल चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन को ट्रैक और ब्लॉक करने की राष्ट्रीय प्रणाली है। इस पोर्टल की मदद से IMEI नंबर के आधार पर मोबाइल की पहचान की जाती है और उसे विभिन्न नेटवर्क पर ट्रैक किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पहले मोबाइल चोरी या गुम होने के बाद उन्हें ट्रेस करना बेहद कठिन होता था, लेकिन CEIR प्रणाली के बाद पुलिस और दूरसंचार एजेंसियों के बीच समन्वय बेहतर हुआ है। इससे चोरी के मोबाइलों के पुन: उपयोग और अवैध बिक्री पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिल रही है।
कैसे हुई बरामदगी?
Sanjay Kumar और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त Shailendra Singh Chauhan के निर्देश पर संपत्ति संबंधी अपराधों में बरामदगी बढ़ाने के लिए विशेष निगरानी की जा रही थी।
इसी क्रम में थाना हनुमानगंज पुलिस ने गुम मोबाइलों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें CEIR पोर्टल पर अपलोड किया। इसके बाद मोबाइल एक्टिविटी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और CAF रिपोर्ट के आधार पर तकनीकी जांच की गई। पुलिस टीम ने विभिन्न लोकेशन से कुल 50 मोबाइल बरामद किए।
साइबर अपराध और मोबाइल सुरक्षा का बढ़ता खतरा
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार गुम या चोरी हुए मोबाइल फोन केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि—
बैंकिंग फ्रॉड
यूपीआई धोखाधड़ी
सोशल मीडिया दुरुपयोग
निजी डेटा लीक
और पहचान चोरी
जैसे गंभीर अपराधों का माध्यम भी बन सकते हैं।
यही कारण है कि अब पुलिस मोबाइल गुम होने की शिकायतों को सामान्य “लॉस्ट प्रॉपर्टी” की तरह नहीं देख रही, बल्कि उन्हें साइबर सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्व दिया जा रहा है।
तकनीकी पुलिसिंग की ओर बढ़ता भोपाल
इस कार्रवाई को भोपाल पुलिस की तकनीक आधारित जांच प्रणाली का उदाहरण माना जा रहा है। पहले जहां गुम मोबाइल की बरामदगी भाग्य पर निर्भर मानी जाती थी, वहीं अब डेटा एनालिसिस, डिजिटल ट्रैकिंग और राष्ट्रीय डेटाबेस के कारण सफलता दर बढ़ रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है that नागरिकों को मोबाइल गुम होने पर तुरंत—
IMEI नंबर सुरक्षित रखना
CEIR पोर्टल पर शिकायत करना
और नजदीकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराना
चाहिए, ताकि मोबाइल के दुरुपयोग को रोका जा सके।
टीमवर्क से मिली सफलता
इस अभियान में थाना प्रभारी Avadhesh Singh Bhadauriya के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी जांच और फील्ड कार्रवाई को समन्वित तरीके से अंजाम दिया।
बरामदगी में पुलिसकर्मियों की विशेष भूमिका को भी सराहा गया, जिसमें साइबर ट्रैकिंग और डेटा विश्लेषण की मदद से मोबाइलों तक पहुंच बनाई गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पुलिसिंग का बड़ा हिस्सा तकनीक आधारित होने वाला है। मोबाइल, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन पहचान से जुड़े अपराध बढ़ने के साथ साइबर फॉरेंसिक और डिजिटल ट्रैकिंग की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।



