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विश्व पर्यावरण दिवस से पहले रेलवे का स्वच्छता अभियान, भोपाल मंडल ने स्टेशनों पर शुरू की हरित पहल

भोपाल ।भारतीय रेलवे अब केवल परिवहन सेवा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में West Central Railway के भोपाल मंडल ने विश्व पर्यावरण दिवस अभियान के तहत भोपाल, इटारसी और बीना सहित प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर विशेष स्वच्छता एवं जनजागरूकता अभियान चलाया।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब देश के बड़े रेलवे स्टेशनों पर प्रतिदिन लाखों यात्रियों की आवाजाही होती है और स्वच्छता, कचरा प्रबंधन तथा पर्यावरण संरक्षण रेलवे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि स्टेशन केवल यात्रा का केंद्र नहीं, बल्कि शहर की सार्वजनिक छवि का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

क्यों महत्वपूर्ण हैं रेलवे स्टेशन?

भारत में रेलवे स्टेशन छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक सार्वजनिक जीवन का सबसे सक्रिय स्थान माने जाते हैं। यहां हर दिन बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा, खाद्य अपशिष्ट और अन्य ठोस अपशिष्ट उत्पन्न होता है। यदि नियमित सफाई और जनजागरूकता अभियान न चलें, तो यह न केवल यात्रियों के स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार रेलवे परिसरों में स्वच्छता बनाए रखना केवल सौंदर्यीकरण का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, संक्रमण नियंत्रण और शहरी पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ा मुद्दा है।

भोपाल स्टेशन पर स्वच्छता के साथ जागरूकता पर जोर

Bhopal Junction railway station पर अभियान के दौरान स्टेशन परिसर के चिन्हित क्षेत्रों में विशेष सफाई की गई। साथ ही यात्रियों और कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक उपयोग कम करने और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने के प्रति जागरूक किया गया।

रेलवे प्रशासन अब केवल सफाई कर्मचारियों पर निर्भर रहने की बजाय यात्रियों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण मान रहा है। यही कारण है कि जागरूकता अभियान को स्वच्छता अभियान के साथ जोड़ा जा रहा है।

इटारसी जैसे जंक्शन पर सफाई क्यों ज्यादा अहम?

Itarsi Junction railway station देश के सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शनों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में लंबी दूरी की ट्रेनें गुजरती हैं, जिससे स्टेशन पर लगातार दबाव बना रहता है।

अभियान के दौरान सर्कुलेटिंग एरिया, ट्रैक, फुटओवर ब्रिज, शौचालय और वाटर बूथ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष सफाई कराई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे ट्रैक और प्लेटफॉर्म क्षेत्रों की नियमित सफाई केवल दृश्य स्वच्छता के लिए नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं, दुर्गंध और संक्रमण नियंत्रण के लिए भी जरूरी होती है।

बीना स्टेशन पर विभागों का संयुक्त प्रयास

Bina Junction railway station पर वाणिज्य, चिकित्सा और यांत्रिक विभागों ने संयुक्त रूप से सफाई कर्मचारियों के साथ संवाद किया। यह मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रेलवे स्वच्छता अब केवल सफाई विभाग का विषय नहीं रह गया है।

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे परिसरों में स्वच्छ शौचालय, साफ पेयजल और कचरा प्रबंधन सीधे यात्रियों के स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं। विशेषकर गर्मी और मानसून के दौरान संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

रेलवे की “ग्रीन ट्रांसपोर्ट” छवि पर जोर

भारतीय रेलवे पहले से ही सड़क परिवहन की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल परिवहन माध्यम माना जाता है। अब रेलवे प्रशासन स्टेशन परिसरों को भी “ग्रीन और सस्टेनेबल पब्लिक स्पेस” में बदलने की दिशा में काम कर रहा है।

हाल के वर्षों में रेलवे ने—

सिंगल यूज प्लास्टिक कम करने

वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम

सोलर ऊर्जा

जल संरक्षण

बायो-टॉयलेट
जैसी कई पहलों पर काम शुरू किया है।


भोपाल मंडल का यह अभियान उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या केवल अभियान काफी हैं?

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि एक-दो दिन के अभियान प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण जरूर होते हैं, लेकिन स्थायी बदलाव के लिए निरंतर निगरानी, पर्याप्त संसाधन और यात्रियों की सहभागिता जरूरी है।

यदि रेलवे स्टेशन पर कचरा पृथक्करण, प्लास्टिक नियंत्रण और स्वच्छता नियमों को नियमित व्यवहार का हिस्सा बनाया जाए, तो रेलवे परिसर वास्तव में पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक स्थानों में बदल सकते हैं।

भोपाल मंडल द्वारा शुरू किया गया यह अभियान इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जहां स्वच्छता को केवल सफाई नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।

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