भीमबेटका में ब्रिक्स डेलीगेट्स ने जानी मानव और प्रकृति के हजारों साल पुराने रिश्ते की कहानी

प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और प्राकृतिक-सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा, 15 से अधिक प्रतिनिधियों ने किया भ्रमण
भोपाल, 9 अगस्त 2026। ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह एवं मंत्री समूह के डेलीगेट्स ने रविवार को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल भीमबेटका रॉक शेल्टर्स का भ्रमण किया। दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, रूस और चीन सहित ब्रिक्स देशों से आए 15 से अधिक प्रतिनिधियों ने यहां हजारों वर्ष पुरानी मानव सभ्यता, प्रागैतिहासिक शैलचित्रों और प्राकृतिक-सांस्कृतिक विरासत को करीब से जाना।
गाइडेड हेरिटेज टूर के दौरान प्रतिनिधियों ने विभिन्न शैलाश्रयों का भ्रमण किया। उन्होंने शैलचित्रों के माध्यम से प्रागैतिहासिक मानव की जीवनशैली, सामाजिक गतिविधियों और प्रकृति एवं वन्यजीवों के साथ उसके संबंध को समझा।
शैलचित्रों में दिखा प्रकृति से जुड़ाव
भीमबेटका के शैलाश्रयों में बने चित्रों में हाथी, गौर, हिरण, बंदर और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के चित्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इन चित्रों से यह समझने का अवसर मिला कि प्राचीन मानव के जीवन और उसकी कलात्मक अभिव्यक्ति में प्राकृतिक दुनिया का कितना महत्वपूर्ण स्थान था।
भीमबेटका के शैलचित्र केवल प्राचीन कला के नमूने नहीं हैं, बल्कि वे मानव और उसके प्राकृतिक परिवेश के बीच हजारों वर्ष पुराने संबंध की कहानी भी बताते हैं। यहां मानव आकृतियों, वन्यजीवों, शिकार, सामूहिक गतिविधियों और प्रकृति के साथ मानव के जुड़ाव को दर्शाने वाले अनेक चित्र मौजूद हैं।
750 से अधिक शैलाश्रयों का क्षेत्र
भीमबेटका क्षेत्र में 750 से अधिक रॉक शेल्टर्स हैं, जिनमें 100 से अधिक शैलाश्रयों में चित्र पाए गए हैं। इन चित्रों में अलग-अलग कालखंडों की कलात्मक परंपराओं की निरंतरता दिखाई देती है।
कुछ शैलचित्रों में शिकार और सामुदायिक गतिविधियों के दृश्य दिखाई देते हैं, जबकि बाद के काल के चित्रों में जुलूस, योद्धाओं और सामूहिक अनुष्ठानों जैसे प्रसंग भी देखने को मिलते हैं।
कला के जरिए समझी मानव सभ्यता की यात्रा
ब्रिक्स प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका का भ्रमण केवल एक पुरातात्विक स्थल को देखने तक सीमित नहीं रहा। शैलचित्रों के माध्यम से उन्हें मानव सभ्यता की विकास यात्रा, उसकी रचनात्मकता और प्राकृतिक परिवेश के साथ उसके संबंध को समझने का अवसर मिला।
हजारों वर्ष पहले चट्टानों पर बनाई गई ये आकृतियां आज भी प्राचीन मानव की कल्पनाशीलता, कलात्मक अभिव्यक्ति और अपने आसपास की प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता की कहानी कहती हैं।
मध्यप्रदेश की यह प्रागैतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत ब्रिक्स देशों से आए प्रतिनिधियों के सामने प्रदेश की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और मानव-प्रकृति के प्राचीन संबंधों की एक अनूठी तस्वीर प्रस्तुत करती नजर आई।





