गुना के सोंठी में सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त के आरोप, जिल्द-बंदोबस्त रिकॉर्ड की जांच की मांग

सर्वे नंबर 11 की जमीन जिल्द-बंदोबस्त में ‘कदीम’ शासकीय दर्ज होने का दावा, पट्टा भूमि के हस्तांतरण पर उठे सवाल
गुना। ग्राम सोंठी में कुछ जमीनों की खरीद-फरोख्त को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। स्थानीय सूत्रों के हवाले से आरोप लगाया गया है कि जिन भूमि खसरों को पुराने जिल्द-बंदोबस्त रिकॉर्ड में शासकीय दर्ज बताया जा रहा है, उनका पट्टा भूमि के रूप में हस्तांतरण और बाद में खरीद-फरोख्त होती रही।
मामले में प्रशासन से पुराने राजस्व रिकॉर्ड, वर्तमान खसरा, नामांतरण और पंजीयन दस्तावेजों की जांच कर जमीन के वास्तविक स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
सर्वे नंबर 11 की जमीन को लेकर विवाद
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम सोंठी तहसील गुना की सर्वे नंबर 11/2, 11/3 और 11/2 से संबंधित कुल करीब 2.926 हेक्टेयर भूमि को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संबंधित भूमि पट्टा भूमि थी और आवश्यक अनुमति के बिना उसका हस्तांतरण किया गया।
दावा यह भी है कि जमीन खरीदने वाले कुछ लोगों ने आगे इसे अन्य व्यक्तियों को बेच दिया। इन लेन-देन का पंजीयन होने और बाद में तहसील रिकॉर्ड में नाम दर्ज किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित वर्षों के मूल राजस्व रिकॉर्ड, पंजीयन दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों के आदेशों की जांच के बाद ही हो सकती है।
जिल्द-बंदोबस्त में ‘कदीम’ शासकीय दर्ज होने का दावा
मामले में उपलब्ध बताए जा रहे राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया गया है कि सर्वे नंबर 11 से संबंधित करीब 51 बीघा भूमि जिल्द-बंदोबस्त में ‘कदीम’ शासकीय दर्ज है।
यदि पुराने रिकॉर्ड में भूमि वास्तव में शासकीय श्रेणी में दर्ज है तो उसके बाद हुए हस्तांतरण, नामांतरण और पंजीयन की वैधता की जांच जरूरी हो जाती है। इसी आधार पर प्रशासन से पूरे रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की जा रही है।
बिक्री अनुमति को लेकर भी उठे सवाल
मामले में यह भी सवाल उठाया गया है कि पट्टा या विक्रय-वर्जित भूमि के मामले में बिक्री की अनुमति किस व्यक्ति द्वारा और किस आधार पर मांगी या प्राप्त की गई। आरोप लगाने वालों का कहना है कि ऐसी भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया में मूल पट्टेदार या संबंधित अधिकारधारी की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
इसलिए प्रशासन से मांग की गई है कि संबंधित भूमि की पुरानी स्थिति से लेकर वर्तमान स्वामित्व तक के सभी दस्तावेजों की जांच की जाए।
प्लॉट खरीदने से पहले रिकॉर्ड जांचने की अपील
सोंठी में जमीन की कथित खरीद-फरोख्त का मामला सामने आने के बाद लोगों से अपील की गई है कि किसी भी प्लॉट या भूमि को खरीदने से पहले उसके खसरा, नक्शा, जिल्द-बंदोबस्त रिकॉर्ड, स्वामित्व, नामांतरण और बिक्री अनुमति की प्रमाणित जांच कर लें।
यदि जांच में शासकीय भूमि के अवैध हस्तांतरण या नियम विरुद्ध पंजीयन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
महत्वपूर्ण: इस खबर में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। प्रशासन, पंजीयन विभाग और संबंधित भूमि धारकों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।





