भोपाल, 27 जुलाई। नगर निगम भोपाल शहर के जैविक कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन की दिशा में एक और पहल कर रहा है। भौंरी स्थित पालीवाल बायो-सीएनजी प्लांट में अब बारिश के मौसम में बड़ी मात्रा में उपलब्ध हो रहे मक्के के भुट्टों के डंठल और छिलकों से बायो-सीएनजी (Bio-CNG) का उत्पादन शुरू कर दिया गया है। इससे पहले गर्मी के मौसम में प्लांट में गन्ने की चरखी से निकलने वाले सूखे अवशेषों से बायो-सीएनजी तैयार की जा रही थी।
भुट्टों के वेस्ट का हो रहा संग्रह
नगर निगम के कर्मचारी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लगे भुट्टे के ठेलों और दुकानों से निकलने वाले डंठल, छिलके और अन्य जैविक कचरे को एकत्र कर गार्बेज स्टेशनों तक पहुंचाते हैं। यहां से प्लांट का विशेष वाहन इस कचरे को भौंरी स्थित बायो-सीएनजी प्लांट तक ले जाता है, जहां इसका प्रसंस्करण कर गैस तैयार की जाती है।
रोजाना 100 से 120 क्विंटल जैविक कचरा
नगर निगम के अनुसार, शहर में इन दिनों 4,000 से अधिक भुट्टे के ठेले संचालित हो रहे हैं। इनसे प्रतिदिन 100 से 120 क्विंटल डंठल, छिलके और अन्य जैविक अवशेष एकत्र किए जा रहे हैं, जिन्हें बायो-सीएनजी उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जा रहा है।
प्रतिदिन डेढ़ क्विंटल तक बायो-सीएनजी उत्पादन
भौंरी स्थित 5 टन क्षमता वाले बायो-सीएनजी प्लांट से प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल बायो-सीएनजी का उत्पादन हो रहा है। इस ग्रीन फ्यूल का उपयोग नगर निगम के सीएनजी चालित वाहनों में किया जाएगा। इससे डीजल जैसे प्रदूषणकारी ईंधन पर निर्भरता कम होगी और शहर के जैविक कचरे का भी प्रभावी निष्पादन सुनिश्चित होगा।
अपर आयुक्त ने क्या कहा
नगर निगम के अपर आयुक्त वरुण अवस्थी ने बताया कि भुट्टों के डंठल और गन्ने के सूखे अवशेषों में पर्याप्त जैविक ऊर्जा होती है। इनका वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर ग्रीन फ्यूल तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग वाहनों के ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कचरा प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलता है।
