लिंक और रोटेशन प्रणाली के पालन की मांग, 6 से 12 माह के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की मांग
ग्वालियर। झांसी मंडल के ग्वालियर डिपो में ट्रेन मैनेजरों की ड्यूटी और मेल ट्रेनों के लिंक आवंटन को लेकर कर्मचारियों में असंतोष सामने आया है। कर्मचारियों ने निर्धारित लिंक, वरिष्ठता और रोटेशन व्यवस्था का समान रूप से पालन किए जाने की मांग की है।
रेलवे के विभिन्न डिपो में ट्रेन मैनेजरों की ड्यूटी निर्धारित लिंक और नियमों के अनुसार लगाई जाती है। इसका उद्देश्य सभी कर्मचारियों को समान अवसर देने के साथ ड्यूटी और माइलेज में पारदर्शिता बनाए रखना है। आरोप है कि ग्वालियर डिपो में कुछ कर्मचारियों को लगातार ऐसी गाड़ियां और लिंक मिल रहे हैं, जिनसे उन्हें अपेक्षाकृत अधिक माइलेज मिल रहा है।
मामले में ट्रेन मैनेजर संजीव शर्मा की पिछले 6 से 12 माह की वर्किंग, लिंक, गाड़ी संख्या, दिशा और माइलेज की तुलनात्मक जांच की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी ड्यूटी की तुलना अन्य ट्रेन मैनेजरों के रिकॉर्ड से की जाए, तो निर्धारित रोटेशन व्यवस्था के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
यह आरोप भी लगाया गया है कि शर्मा को बड़ी संख्या में दिल्ली दिशा की गाड़ियां आवंटित की जा रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ड्यूटी आवंटन में किसी तरह का पक्षपात या अनुचित लाभ हुआ है या नहीं, यह केवल रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।
इन बिंदुओं पर जांच की मांग
कर्मचारियों ने पिछले 6 से 12 माह के सभी ट्रेन मैनेजरों की ड्यूटी और लिंक की जांच, गाड़ी संख्या, दिशा, रोस्टर और माइलेज का तुलनात्मक परीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही ड्यूटी आवंटित करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करने को कहा गया है।
मांग की गई है कि यदि जांच में किसी कर्मचारी या अधिकारी को अनुचित लाभ दिए जाने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। भविष्य में ड्यूटी निर्धारित लिंक, वरिष्ठता और पारदर्शी रोटेशन के आधार पर लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग है।
कर्मचारियों का कहना है कि ट्रेन मैनेजर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। इसलिए उनकी ड्यूटी व्यवस्था में पारदर्शिता और समान अवसर बनाए रखना जरूरी है।
