अर्जुन नगर झुग्गी बस्ती संकट: शाम को मिली जगह, सुबह प्रशासन ने हटाया सामान, खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवार

अयोध्या बायपास विस्थापन विवाद में फंसे सैकड़ों लोग, मंत्री और प्रशासन पर राजनीति के आरोप
भोपाल, 13 मई। राजधानी भोपाल के अयोध्या बायपास स्थित अर्जुन नगर झुग्गी बस्ती के विस्थापित परिवार पिछले एक सप्ताह से खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी और 43 डिग्री तापमान के बीच छोटे-छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ सड़क किनारे रहने वाले इन परिवारों का आरोप है कि वे मंत्री और प्रशासनिक राजनीति का शिकार बन रहे हैं। कभी उन्हें लालपुरा में बसाने का आश्वासन दिया जाता है तो कभी कान्हासैंया में जगह दिखाई जाती है, लेकिन अगले ही दिन वहां से भी हटा दिया जाता है।
अर्जुन नगर झुग्गी हटाने की कार्रवाई के बाद से प्रभावित परिवार लगातार कलेक्टर कार्यालय, जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी है। बस्तीवासियों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि रहने के लिए सुरक्षित छत अब तक नसीब नहीं हुई।
मंत्री कृष्णा गौर से मिले थे बस्तीवासी
अर्जुन नगर झुग्गी बस्ती के लोगों की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता आरती शर्मा लगातार संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह सभी विस्थापित परिवार गोविंदपुरा क्षेत्र की विधायक और राज्यमंत्री कृष्णा गौर के 74 बंगला स्थित निवास पर पहुंचे थे। वहां मंत्री ने गोविंदपुरा तहसीलदार को पुनर्वास के लिए जगह आवंटित करने के निर्देश दिए और क्षेत्रीय पार्षद को भी साथ भेजा गया।
इसके बाद कान्हासैंया क्षेत्र में पटवारी और पार्षद द्वारा जमीन चिन्हित कर बस्तीवासियों को वहां अस्थायी रूप से रहने की अनुमति दिए जाने का दावा किया गया। देर शाम तक लोगों ने बांस-बल्ली और प्लास्टिक पन्नियों की मदद से अपने रहने की व्यवस्था भी तैयार कर ली थी। विस्थापित परिवारों को लगा कि अब उन्हें सिर छुपाने के लिए जगह मिल जाएगी।
सुबह पहुंचा प्रशासन, तोड़ दी अस्थायी झुग्गियां
लेकिन अगले ही दिन सुबह हालात पूरी तरह बदल गए। आरती शर्मा के अनुसार, कान्हासैंया गांव के सरपंच, पटवारी और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और रातभर में बनाई गई अस्थायी झुग्गियों को हटवा दिया। बांस-बल्ली और पन्नियों को तोड़कर फेंक दिया गया तथा लोगों को वहां से हटने के लिए कहा गया।
इस कार्रवाई के बाद महिलाएं और बच्चे फिर सड़क पर आ गए। बस्तीवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने पहले रहने की अनुमति दी और बाद में खुद ही उसे नकार दिया। इससे विस्थापित परिवारों में भारी नाराजगी है।
एसडीएम ने अनुमति देने से किया इनकार
आरती शर्मा ने बताया कि जब स्थानीय लोगों ने हूजूर एसडीएम से इस संबंध में बात की तो उन्होंने साफ कहा कि प्रशासन की ओर से ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई है। एसडीएम का कहना था कि न तो उनसे कोई आधिकारिक चर्चा हुई और न ही झुग्गियां बसाने की स्वीकृति दी गई है।
इस बयान के बाद बस्तीवासियों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर उन्हें बसाने का आश्वासन किस आधार पर दिया गया था। विस्थापित परिवारों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा गरीब लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
पीएम आवास योजना के तहत मकान देने की मांग
बस्तीवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार चाहे तो इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्थायी आवास उपलब्ध कराया जा सकता है। आरती शर्मा ने आरोप लगाया कि अर्जुन नगर झुग्गीवासियों के साथ राजनीति की जा रही है, जबकि उनके पास वैध पट्टे भी मौजूद हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में श्यामला हिल्स स्थित मानस भवन के पीछे की झुग्गियों को हटाकर वहां रहने वाले लोगों को मालाखेड़ी में पीएम आवास योजना के मकान दिए गए। जबकि उन लोगों के पास पट्टे तक नहीं थे। इसके विपरीत अर्जुन नगर के कई परिवार वर्षों से वहां रह रहे हैं और दस्तावेज भी रखते हैं, फिर भी उन्हें स्थायी पुनर्वास नहीं दिया जा रहा।
भीषण गर्मी में मानवीय संकट गहराया
एक सप्ताह से सड़क किनारे रह रहे परिवारों के सामने पीने के पानी, भोजन, शौचालय और बच्चों की सुरक्षा जैसी गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं। दिन में तेज धूप और रात में असुरक्षा के बीच महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को राजनीतिक विवाद से ऊपर उठकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विस्थापित परिवारों की मांग है कि उन्हें जल्द से जल्द स्थायी पुनर्वास दिया जाए ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।






