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सीलिंग कार्रवाई से मास्टर प्लान पर बढ़ा दबाव, व्यापारियों की मांग से जनप्रतिनिधियों में हलचल

सरकार में नए मास्टर प्लान को लेकर मंथन, जनप्रतिनिधियों से सुझाव के बाद सितंबर में ड्राफ्ट लाने की तैयारी की चर्चा; टीएंडसीपी को अभी नहीं मिला कोई औपचारिक निर्देश

भोपाल, 2 सितंबर। राजधानी भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ चल रही नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई ने करीब दो दशक से लंबित मास्टर प्लान के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़कों पर उतर रहे हैं। ऐसे में शहर की मौजूदा जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग तय करने के लिए मास्टर प्लान को जल्द लागू करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

व्यापारियों का तर्क है कि पिछले दो दशक में भोपाल का स्वरूप तेजी से बदला है। कई ऐसे क्षेत्र, जो कभी मुख्य रूप से आवासीय माने जाते थे, वहां समय के साथ व्यावसायिक गतिविधियां विकसित हो गई हैं। ऐसे में पुराने भूमि उपयोग प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय नए मास्टर प्लान में वर्तमान स्थिति और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट व्यवस्था की जानी चाहिए।

सरकार के स्तर पर फिर शुरू हुआ मंथन

मास्टर प्लान को लेकर शासन स्तर पर एक बार फिर चर्चा शुरू होने की जानकारी सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूर्व में तैयार किए गए प्रस्तावित मसौदे पर विचार कर रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा और क्षेत्रवार सुझाव लेने के बाद ड्राफ्ट को सार्वजनिक किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ड्राफ्ट कब जारी होगा। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) के अधिकारियों के अनुसार उन्हें मास्टर प्लान को लेकर फिलहाल कोई औपचारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। इसलिए सितंबर में ड्राफ्ट जारी होने की संभावना को अभी आधिकारिक कार्यक्रम नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और शहर की जरूरतें

आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर न्यायालय के निर्देशों का पालन कराने की चुनौती है, तो दूसरी ओर तेजी से विकसित हो चुके शहर में व्यावसायिक गतिविधियों और भूमि उपयोग को व्यवस्थित करने की जरूरत है।

करीब 21-22 वर्षों से नए मास्टर प्लान का इंतजार होने के कारण शहर के विकास को लेकर कई स्तरों पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। नए मास्टर प्लान से अलग-अलग क्षेत्रों के भूमि उपयोग, आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों तथा भविष्य के विस्तार को लेकर अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।

व्यापारियों के विरोध से जनप्रतिनिधियों पर बढ़ा दबाव

सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों के प्रदर्शन और बाजार बंद के ऐलान के बाद जनप्रतिनिधियों की सक्रियता भी बढ़ी है। व्यापारियों की मांग है कि कार्रवाई से प्रभावित क्षेत्रों की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए और शहर की वर्तमान स्थिति के अनुरूप भूमि उपयोग की व्यवस्था की जाए।

जनप्रतिनिधियों के माध्यम से क्षेत्रवार समस्याओं और स्थानीय जरूरतों को सरकार तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है। इन्हीं सुझावों के आधार पर मास्टर प्लान के प्रस्तावित ड्राफ्ट में आवश्यक बदलाव किए जाने की संभावना है।

ड्राफ्ट आने पर जनता दे सकेगी आपत्ति-सुझाव

यदि सरकार की ओर से मास्टर प्लान का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाता है, तो संबंधित प्रक्रिया के तहत आम लोगों, व्यापारियों और अन्य हितधारकों को प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियां और सुझाव रखने का अवसर मिल सकता है। इसके बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

टीएंडसीपी को औपचारिक निर्देश का इंतजार

मास्टर प्लान को लेकर शासन स्तर पर चर्चा की खबरों के बीच टीएंडसीपी के अधिकारियों का कहना है कि विभाग को अभी तक कोई औपचारिक निर्देश नहीं मिला है। ऐसे में ड्राफ्ट जारी करने की तारीख फिलहाल तय नहीं है।

हालांकि, सितंबर में ड्राफ्ट सामने आने की संभावनाओं को लेकर शासन स्तर पर चर्चा जारी होने की बात कही जा रही है। यदि ऐसा होता है तो सीलिंग कार्रवाई के बीच मास्टर प्लान का ड्राफ्ट शहर के भविष्य के विकास के साथ-साथ मौजूदा व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर चल रही बहस को भी नई दिशा दे सकता है।

21 साल से इंतजार, अब उम्मीदें तेज

भोपाल के नए मास्टर प्लान का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा है। अब सीलिंग कार्रवाई के कारण यह मुद्दा सीधे व्यापारियों, स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की चिंता से जुड़ गया है। ऐसे में निगाह इस बात पर है कि सरकार पुराने शहर, विकसित हो चुके आवासीय क्षेत्रों और तेजी से फैलते नए भोपाल के बीच भूमि उपयोग का संतुलन किस तरह तय करती है।

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