साक्षरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही महिलाएं : डॉ. कामिनी मेहरा

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस और सहारा साक्षरता संस्था के 21वें स्थापना दिवस पर आत्मनिर्भर महिलाओं का सम्मान
भोपाल। शिक्षा केवल पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास पैदा करने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने का माध्यम भी है। खासकर महिलाओं के लिए शिक्षा उन्हें आत्मनिर्भर बनने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का रास्ता दिखाती है। यह बात डॉ. कामिनी मेहरा ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस और सहारा साक्षरता संस्था के 21वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह में कही।
समारोह में विपरीत परिस्थितियों से संघर्ष कर अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बनने वाली महिलाओं का सम्मान किया गया। इन महिलाओं ने अपनी मेहनत से न केवल खुद की स्थिति बदली, बल्कि परिवार को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाया। उनके संघर्ष और सफलता की कहानियां समारोह में मौजूद अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं।
मुख्य अतिथि डॉ. कामिनी मेहरा ने कहा कि साक्षरता को केवल अक्षर ज्ञान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। शिक्षा महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाती है और उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी देती है। शिक्षित और आत्मनिर्भर महिला परिवार की मजबूत नींव होती है और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि पिछड़ी बस्तियों में रहने वाले बच्चों में भी प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें शिक्षा, संस्कार और आगे बढ़ने का अवसर देने की है। सही मार्गदर्शन मिलने पर ये बच्चे अपनी प्रतिभा के दम पर बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
डॉ. मेहरा ने सहारा साक्षरता संस्था द्वारा पिछले 21 वर्षों से शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने संस्था के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
शिक्षा के साथ हुनर भी जरूरी
सिलाई कढ़ाई बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सुनील महेश्वरी ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा के साथ कौशल विकास भी जरूरी है। जब महिला के पास शिक्षा और हुनर दोनों होते हैं तो वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है और परिवार को आर्थिक मजबूती दे सकती है।
उन्होंने कहा कि सहारा साक्षरता संस्था वंचित वर्ग की महिलाओं और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे रही है। ऐसे प्रयासों को समाज के सभी वर्गों का सहयोग मिलना चाहिए।
बच्चों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
समारोह में पिछड़ी बस्तियों के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। बच्चों के आत्मविश्वास और प्रतिभा ने कार्यक्रम में उत्साह भर दिया। प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि प्रतिभा किसी विशेष वर्ग या संसाधन की मोहताज नहीं होती, उसे केवल सही अवसर और मार्गदर्शन की जरूरत होती है।
कार्यक्रम में लोक प्याली चाय के संस्थापक कृष्णा चौहान, समाजसेविका उषा शनाय, सहारा साक्षरता समाजसेवी संस्थान के संस्थापक शिवराज कुशवाहा सहित समाजसेवी, महिलाएं, बच्चे और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।





