90 दिन की समयसीमा में 30 दिन आपत्तियों के लिए निर्धारित
दिनों में पूरी करनी होगी आगे की प्रक्रिया
भोपाल। शहर के भविष्य की दिशा तय करने वाले मास्टर प्लान पर आई आपत्तियों की छंटनी का काम जारी है। नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) कार्यालय में फिलहाल यह देखा जा रहा है कि मास्टर प्लान के किस प्रावधान, सड़क, भू-उपयोग और क्षेत्र को लेकर कितनी आपत्तियां मिली हैं। शासन ने मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया के लिए कुल 90 दिन की समयसीमा निर्धारित की है, जिसमें 30 दिन आपत्तियां प्राप्त करने के लिए रखे गए थे। यह अवधि पूरी होने के बाद अब शेष 60 दिनों में आपत्तियों के परीक्षण से लेकर सुनवाई तक की प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है।
पहले मुद्दों की छंटनी, फिर आपत्तिकर्ताओं को बुलावा
टीएंडसीपी कार्यालय में अभी आपत्तियों को विषयवार अलग-अलग किया जा रहा है। इस छंटनी के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि किस मुद्दे पर सबसे ज्यादा आपत्तियां आई हैं और किन प्रावधानों को लेकर लोगों ने बदलाव की मांग की है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपत्तिकर्ताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। सुनवाई के दौरान संबंधित लोगों का पक्ष सुना जाएगा और उनकी आपत्तियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी।
मास्टर प्लान कब होगा लागू, अभी स्थिति स्पष्ट नहीं
मास्टर प्लान को लागू करने की तारीख को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मास्टर प्लान कब तक लागू हो पाएगा। फिलहाल शासन की ओर से तय समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में अगले 60 दिन अहम होंगे, क्योंकि आपत्तियों की छंटनी और सुनवाई के बाद ही मास्टर प्लान के अगले चरण की तस्वीर साफ हो सकेगी।
डेला का ₹2,250 करोड़ का प्रस्ताव भोपाल के विकास में अहम पड़ाव: मनोज मीक
‘कमाल का भोपाल’ अभियान के फाउंडर और क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने कहा कि डेला समूह का ₹2,250 करोड़ के विकास मूल्य वाला प्रस्ताव भोपाल की खूबियों को आर्थिक अवसरों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे राजधानी में पर्यटन, निवेश और रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
मीक ने कहा कि भोपाल की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी खूबियां निवेश और नागरिकों की समृद्धि का आधार बनें। प्रस्तावित डेला रेसकोर्स भोपाल में विला, ब्रांडेड आवास, पांच सितारा पर्यटन रिसॉर्ट, घुड़सवारी और पोलो जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय पर्यटन और वेलनेस सुविधाओं से पर्यटकों का ठहराव बढ़ सकता है। इससे स्थानीय युवाओं, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारियों को लाभ मिलेगा। मीक ने कहा कि प्रकृति और जलसंपदा का संरक्षण तथा स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। यही ‘कमाल का भोपाल’ अभियान का संकल्प है।
