केरवा जलाशय के FTL और ग्रीन बेल्ट में 19 अतिक्रमण दर्ज, आईएएस, आइपीएस, मंत्री के बने हैं निर्माण

NGT के आदेश के आठ महीने बाद भी नहीं हटा कोपरा, बॉटनिकल गार्डन की जमीन पर निर्माण और नदी पर बिना अनुमति पुल बनाने का मामला सामने आया
भोपाल, 23 अक्टूबर। केरवा जलाशय के फुल टैंक लेवल (FTL), बफर जोन और ग्रीन बेल्ट में अतिक्रमण के 19 मामले सामने आए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेश पर गठित संयुक्त समिति ने 22 अक्टूबर को जलाशय के आसपास ग्राउंड ट्रूथिंग की। निरीक्षण के दौरान निजी निर्माणों के साथ मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम और जल संसाधन विभाग (WRD) से जुड़े निर्माण भी अतिक्रमण संबंधी सूची में दर्ज किए गए हैं।
संयुक्त समिति के निरीक्षण विवरण के अनुसार, मेंडोरा, बरखेड़ी बाज्याफ्त, कुशलपुरा, मुल्ला जी की टेकरी, फतेहपुर डोगरा, महुआखेड़ा और मीटूखेड़ी सहित विभिन्न क्षेत्रों में निर्माण, जमीन पर भराव, रिटेनिंग वॉल और अन्य गतिविधियां दर्ज की गईं। निरीक्षण दल ने GPS लोकेशन के साथ तस्वीरें और वीडियो भी बनाए। कुछ स्थानों की ड्रोन से रिकॉर्डिंग की गई। इन निष्कर्षों को समिति की रिपोर्ट के माध्यम से NGT के सामने रखा जाना है। संबंधित पक्षों का जवाब और सक्षम प्राधिकारियों का सीमांकन इन मामलों में आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मेंडोरा में 12 मामले, सरकारी निर्माण भी सूची में
निरीक्षण विवरण में सबसे ज्यादा 12 प्रविष्टियां मेंडोरा क्षेत्र की हैं। इनमें बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन पर निर्माण और जलाशय की सीमा के आसपास गतिविधियों का उल्लेख है। तीन स्थानों पर डैम की सीमा बताने वाली मुनारें गायब मिलने की बात भी दर्ज की गई है।
मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के पिकनिक रेस्टोरेंट के संबंध में ग्रीन बेल्ट में व्यावसायिक गतिविधियों और बॉटनिकल गार्डन की जमीन पर स्थायी निर्माण का उल्लेख है। निरीक्षण में पेवर फर्श, पवेलियन, लॉन, झूले और कॉटेज जैसी संरचनाएं दर्ज की गईं।
जल संसाधन विभाग के केरवा रेस्ट हाउस के संबंध में भी बॉटनिकल गार्डन की जमीन पर निर्माण और FTL के पास सीमेंट-कंक्रीट के पिलर पाए जाने की जानकारी दी गई है। निरीक्षण विवरण में पेड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी दर्ज की गई है। इन निर्माणों की वैधानिक स्थिति संबंधित विभागों के अभिलेखों और सीमांकन से स्पष्ट होगी।
जलाशय में उतरती दीवारें और जमीन पर भराव
निरीक्षण सूची में अजय सिंह से संबंधित खसरा नंबर 231, 232 और 234 में FTL क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल तथा बॉटनिकल गार्डन की जमीन पर पक्के कमरे होने का उल्लेख है।
वहीं, निशा डागा से संबंधित खसरा नंबर 250, 252 और 256 में करीब 0.93 हेक्टेयर जमीन पर कोपरा यानी मिट्टी-पत्थर का भराव किए जाने और निर्माण जारी रहने की बात दर्ज की गई है। सूची के अनुसार, इस स्थान पर भी डैम की सीमा बताने वाली मुनारें गायब मिलीं।
इसके अलावा नीरव सोंगरा, निशा रजानी, वृंदावन शुक्ला, जगदीश शुक्ला और वैभव प्रकाश से संबंधित अलग-अलग खसरों में FTL क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल होने की जानकारी दर्ज की गई है। रोहन सूर्यवंशी और करण सूर्यवंशी से संबंधित जमीन पर ग्रीन बेल्ट में कृत्रिम तालाब बनाए जाने का उल्लेख भी निरीक्षण रिपोर्ट में है।
बरखेड़ी और कुशलपुरा में भी निर्माण दर्ज
बरखेड़ी बाज्याफ्त में प्रकाश झा और पीजेपी एस्टेट से संबंधित खसरा नंबरों पर बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन में रिटेनिंग वॉल और RCC सड़कें होने की बात दर्ज की गई है। निरीक्षण के दौरान परिसर में निर्माण सामग्री और विकास कार्य भी देखे गए।
कुशलपुरा में डॉ. सुबोध वार्ष्णेय से संबंधित खसरा नंबर 9, 10 और 11 के मामले में डैम की मुनार खिसकाने, FTL के भीतर बाउंड्री बनाने और पानी के एक हिस्से को निजी तालाब के रूप में विकसित करने के आरोप निरीक्षण विवरण में दर्ज हैं। मनीष व्यास, नीरज विजयवर्गीय और उमेश यादव से संबंधित जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां होने की जानकारी भी ड्रोन रिकॉर्डिंग के साथ दर्ज की गई।
मुल्ला जी की टेकरी में रितु गौड़ से संबंधित खसरा नंबर 80, 81 और 82 पर FTL क्षेत्र में तीन परत वाली रिटेनिंग वॉल और बफर जोन या ग्रीन बेल्ट में बंगला होने का उल्लेख है। फतेहपुर डोगरा में मोहम्मद ताहिर से संबंधित जमीन पर भराव और RCC दीवार का निर्माण दर्ज किया गया।
महुआखेड़ा में पुराने आदेश के पालन पर सवाल
महुआखेड़ा के खसरा नंबर 30, 33 और 34 को लेकर निरीक्षण रिपोर्ट में विशेष उल्लेख है। इसके अनुसार, NGT ने 4 फरवरी 2026 के आदेश में यहां का कोपरा हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन 22 अक्टूबर के निरीक्षण के दौरान भी भराव मौजूद मिला।
रिपोर्ट में इस गतिविधि को वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 और जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है। मौके पर जलाशय के किनारे मिट्टी का ऊंचा मेड़ और पानी के भीतर तक जाती बाड़ के खंभे दर्ज किए गए। अब यह देखना होगा कि संबंधित अधिकारियों ने फरवरी के आदेश के पालन के लिए क्या कदम उठाए और भराव हटाने में देरी के क्या कारण रहे।
मीटूखेड़ी में केरवा नदी पर पुल का मामला
निरीक्षण दल ने मीटूखेड़ी में केरवा नदी पर बने सीमेंट-कंक्रीट के पुल को भी दर्ज किया। निरीक्षण विवरण के अनुसार, पुल के निर्माण के लिए अनुमति और वैज्ञानिक अध्ययन से संबंधित दस्तावेज मौके पर स्पष्ट नहीं हुए। सूची में यह आशंका भी जताई गई है कि ढांचे से नदी के प्राकृतिक बहाव पर असर पड़ रहा है।
तस्वीरों में पुल के नीचे पानी की निकासी के लिए पांच पाइप दिखाई देने का उल्लेख है। निरीक्षण दल ने पानी के ठहराव और नदी के बहाव पर संभावित असर को भी दर्ज किया है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव का निर्धारण तकनीकी जांच और संबंधित अनुमतियों के परीक्षण के बाद ही किया जा सकेगा।
मुनारों की स्थिति और सरकारी विभागों की भूमिका अहम
इस पूरे मामले में तीन प्रमुख सवाल सामने आए हैं। पहला, जलाशय की सीमा बताने वाली मुनारें तीन स्थानों पर गायब और एक स्थान पर खिसकी हुई मिलने की बात दर्ज है। दूसरा, पर्यटन विकास निगम और जल संसाधन विभाग से जुड़े निर्माण भी निरीक्षण सूची में शामिल हैं। तीसरा, महुआखेड़ा में पुराने NGT आदेश के पालन की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
वेटलैंड नियम, 2017 के तहत अधिसूचित आर्द्रभूमि में प्रतिबंधित गतिविधियों पर रोक लागू होती है। हालांकि, किसी विशेष स्थान पर नियमों की प्रयोज्यता उसकी अधिसूचित स्थिति और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी। इसी तरह FTL में निर्माण या भराव की वैधानिक स्थिति तय करने के लिए आधिकारिक सीमांकन, भूमि अभिलेख और निर्माण संबंधी अनुमतियों की जांच जरूरी है।
संयुक्त समिति ने निरीक्षण के दौरान तस्वीरें, वीडियो और GPS लोकेशन दर्ज की हैं। अब इन दस्तावेजों को NGT के सामने प्रस्तुत किया जाना है। आगे की कार्रवाई में अतिक्रमण की पुष्टि, सीमा मुनारों की बहाली, पुराने आदेश के पालन और जलाशय के प्राकृतिक बहाव को सुरक्षित रखने से जुड़े निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।





