State

आखिर कब होंगे सहकारिता में चुनाव?

2020 से अध्यक्ष की दरकार, प्रशासकों के भरोसे कॉपरेटिव बैंक और सोसायटियां

भोपाल,1 सितंबर. मध्यप्रदेश में सहकारिता क्षेत्र में चुनाव को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों से लेकर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों तक निर्वाचित प्रतिनिधियों की जगह लंबे समय से प्रशासनिक व्यवस्था के भरोसे कामकाज चलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। किसानों का सवाल है कि आखिर सहकारिता संस्थाओं में नियमित चुनाव कब होंगे और उन्हें अपनी समस्याएं सीधे निर्वाचित प्रतिनिधियों तक पहुंचाने का मौका कब मिलेगा?

सहकारी समितियां किसानों को कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, खाद और बीज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मध्यप्रदेश सरकार की जानकारी के अनुसार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से सदस्यों को ऋण या नकद पर खाद, उन्नत बीज और अन्य कृषि आदान उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

चुनाव नहीं होने से किसानों को परेशानी?

किसानों की सबसे बड़ी चिंता किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण से जुड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को सहकारी संस्थाओं के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं के लिए समितियों और बैंक शाखाओं के चक्कर लगाने पड़ते हैं। किसानों का आरोप है कि कई जगह खाद-बीज की उपलब्धता भी मांग के अनुरूप नहीं हो पाती।

हालांकि खाद-बीज की कमी या किसान क्रेडिट कार्ड में देरी को केवल चुनाव नहीं होने से जोड़ना उचित नहीं होगा। इसके पीछे प्रशासनिक प्रक्रिया, पात्रता, दस्तावेज, स्टॉक और ऋण खाते से जुड़े अलग-अलग कारण भी हो सकते हैं। ऐसे में किसानों की समस्याओं की जिम्मेदारी तय करने के लिए जिला स्तर पर वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है।

वर्षों से चुनाव का इंतजार

मध्यप्रदेश में सहकारी समितियों के चुनाव लंबे समय से विवाद और टलने का विषय रहे हैं। 2024 में जारी चुनाव कार्यक्रम के अनुसार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और अन्य संस्थाओं के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और अपेक्स बैंक के संचालक मंडल के चुनाव का रास्ता बनना था।

2026 में भी सहकारी संस्थाओं के चुनाव को लेकर सरकार की ओर से आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं। रिपोर्टों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सहकारी और कृषि मंडी चुनाव कराने को हरी झंडी दी है।

किसानों का सवाल—कब मिलेगा अपना प्रतिनिधि?

सहकारिता व्यवस्था में किसानों की भागीदारी को मजबूत करने के लिए निर्वाचित संचालक मंडल और अध्यक्ष की भूमिका अहम मानी जाती है। किसानों का कहना है कि जब समितियों में उनके प्रतिनिधि होंगे तो खाद, बीज, ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य समस्याओं को स्थानीय स्तर पर उठाने का प्रभावी मंच भी मिलेगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सहकारी समितियों और कॉपरेटिव बैंकों के चुनाव की अंतिम तारीख क्या होगी? सरकार और राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी की ओर से स्पष्ट कार्यक्रम सामने आने के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी कि वर्षों से चल रही प्रशासकीय व्यवस्था कब खत्म होगी और किसानों को अपनी सहकारी संस्थाओं का निर्वाचित नेतृत्व कब मिलेगा।

Related Articles