जमीन बचाने की कोशिश में बहू के नाम कर दी 9 कट्ठा जमीन, अगले दिन ही हुआ ऐसा खेल

बिहार के जमुई से सामने आया यह मामला किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। यहां विशाल कुमार की मां के नाम 9 कट्ठा जमीन थी। मां बीमार थीं और चाहती थीं कि जिंदगी रहते जमीन बेटे के नाम कर दें, ताकि बाद में कोई विवाद न हो।
लेकिन कहानी में एंट्री हुई सरकारी दफ्तर के कथित ‘जानकार’ की। बताया गया कि बेटे के नाम जमीन करने पर ज्यादा खर्च आएगा, जबकि बहू या बेटी के नाम करने पर काम सस्ता पड़ेगा। अब विशाल इकलौता बेटा था और बहन थी नहीं। परिवार ने सोचा—बहू ही सही, आखिर घर की ही तो है!
बस यहीं से कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि जमीन का कागज हाथ में आते ही अगले दिन कथित तौर पर बहू ममता कुमारी अपने जीजा के साथ चली गई। बताया जा रहा है कि वह अपने साथ एक लड़का और एक लड़की को भी ले गई।
अब विशाल के पास बचा क्या? जमीन के कागज और सरकारी दफ्तरों के चक्कर!
कभी SDM कार्यालय, कभी अफसरों का दरवाजा और कभी किसी से सलाह—विशाल की जिंदगी फिलहाल ‘ऑफिस टू ऑफिस’ हो गई है। हालत यह है कि जिस जमीन को परिवार की सुरक्षा समझकर बचाने की कोशिश की गई थी, वही अब परेशानी की सबसे बड़ी वजह बन गई।
इस कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि जमीन के कागज पर दस्तखत करने से पहले रिश्ते से ज्यादा कागज की भाषा समझना जरूरी है।
और सरकारी दफ्तर के उस कथित दलाल की सलाह तो ऐसी निकली कि सस्ता काम करवाने के चक्कर में विशाल को जिंदगी का सबसे महंगा सबक मिल गया।
अब मामला क्या है, जमीन का हक किसका है और बच्चों को लेकर वास्तविक स्थिति क्या है—यह जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही साफ होगा। फिलहाल विशाल के हाथ में कागज हैं और सामने सरकारी दफ्तरों की लंबी कतार।





