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देशभर में मनाई गई वीर योद्धा कीरत बारी जयंती, प्रतिमा स्थापना की मांग हुई तेज

भोपाल/नई दिल्ली, 6 जून 2026। बारी समाज ने मेवाड़ राजवंश के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वीर योद्धा कीरत बारी की जयंती देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई। विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों में समाज के लोगों ने वीर योद्धा कीरत बारी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

राष्ट्रीय योद्धा बारी कल्याण महासमिति के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रमों में समाज के पदाधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि इतिहास में अनेक ऐसे योद्धा रहे हैं जिनके बलिदान और निष्ठा ने राजवंशों तथा राष्ट्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन उन्हें अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी। वीर योद्धा कीरत बारी भी ऐसे ही ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं, जिनकी स्मृतियों को संरक्षित करने की आवश्यकता है।

कई राज्यों में हुए कार्यक्रम

महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण बारी, राष्ट्रीय संरक्षक जगदीश राउत तथा राष्ट्रीय प्रमुख सलाहकार प्रो. आलोक रंजन ने बताया कि मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, तेलंगाना सहित देश के विभिन्न राज्यों में जयंती कार्यक्रम आयोजित किए गए। समाज के लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और वीर योद्धा कीरत बारी के जीवन एवं योगदान पर प्रकाश डाला।

मेवाड़ राजवंश की रक्षा से जुड़ा ऐतिहासिक योगदान

समिति पदाधिकारियों ने कहा कि ऐतिहासिक परंपराओं और समाज में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार वीर योद्धा कीरत बारी ने मेवाड़ राजवंश के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विशेष रूप से मेवाड़ के उत्तराधिकारी कुँवर उदयसिंह को संकट की परिस्थितियों में सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में उनके योगदान का उल्लेख समाज द्वारा किया जाता है। इसी कारण बारी समाज उन्हें साहस, निष्ठा और समर्पण का प्रतीक मानता है।

राजस्थान सरकार से प्रतिमा स्थापना की मांग

जयंती समारोह के दौरान राष्ट्रीय योद्धा बारी कल्याण महासमिति ने राजस्थान सरकार से वीर योद्धा कीरत बारी की प्रतिमा स्थापित करने की मांग दोहराई। संगठन का सुझाव है कि उदयपुर अथवा कोटा रिवर फ्रंट जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर उनकी प्रतिमा स्थापित कर उनके ऐतिहासिक योगदान को सम्मान दिया जाए।

समिति का मानना है कि इससे न केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व को उचित सम्मान मिलेगा बल्कि युवा पीढ़ी को भी इतिहास के उन अध्यायों से परिचित होने का अवसर मिलेगा, जिनमें साहस और निष्ठा की प्रेरणादायक गाथाएं समाहित हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला समर्थन

प्रतिमा स्थापना की मांग का समर्थन करने वालों में विभिन्न राज्यों के समाज प्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें मध्यप्रदेश से शंभू प्रसाद, बिहार से जगदीश राउत, झारखंड से प्रो. आलोक रंजन, उत्तरप्रदेश से अवधेश बारी, राजस्थान से ज्वाला प्रसाद रावत, उत्तराखंड से धीरू रावत, महाराष्ट्र से प्रभाकर बारी, छत्तीसगढ़ से राजेंद्र बारी, नागालैंड से तारक नाथ, तेलंगाना से अजय रावत तथा कर्नाटक से संध्या जी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

इतिहास के अनदेखे नायकों को पहचान दिलाने की पहल

समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि देश के इतिहास में अनेक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन समय के साथ उनका योगदान व्यापक जनमानस तक नहीं पहुंच पाया। वीर योद्धा कीरत बारी की जयंती का उद्देश्य केवल स्मरण करना नहीं, बल्कि उनके जीवन मूल्यों, साहस और समर्पण को समाज के सामने लाना भी है।

कार्यक्रमों के समापन पर समाज के लोगों ने वीर योद्धा कीरत बारी के सम्मान में प्रतिमा स्थापना, शोध कार्यों को बढ़ावा देने तथा उनके जीवन से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।

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