भोपाल नगर निगम में पदोन्नति पर उठे सवाल, सीपीसीटी और टाइपिंग योग्यता के बिना 14 कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी में पदोन्नत करने का आरोप

भोपाल, 24 जुलाई। भोपाल नगर निगम में हाल ही में जारी पदोन्नति आदेशों को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के पालन के नाम पर जल्दबाजी में नियमों की अनदेखी करते हुए चतुर्थ श्रेणी के 14 कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी (वर्ग-3) के पदों पर पदोन्नत कर दिया गया। इस मामले में अनिवार्य शैक्षणिक और तकनीकी पात्रताओं को नजरअंदाज किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पदोन्नति के दौरान आरक्षण नियमों का पालन तो किया गया, लेकिन लिपिकीय पदों के लिए आवश्यक हिंदी एवं अंग्रेजी टाइपिंग, सीपीसीटी (CPCT) तथा पीजीडीसीए (PGDCA) जैसी अनिवार्य योग्यताओं की अनदेखी की गई। दावा किया जा रहा है कि पदोन्नत किए गए 14 कर्मचारियों में से किसी के पास भी ये अनिवार्य योग्यताएं नहीं हैं।
2014 की पदोन्नतियों पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक नगर निगम में वर्ष 2011 में 75 कर्मचारियों को नियमित किया गया था। बाद में वर्ष 2014 में त्रुटि सुधार के नाम पर उन्हें दोबारा नियमित कर तृतीय श्रेणी में पदोन्नति दी गई। आरोप है कि उस समय भी नियमों का पूर्ण पालन नहीं किया गया था। अब उन्हीं कर्मचारियों को दोबारा पदोन्नति का लाभ मिलने से प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि कई अन्य कर्मचारियों को अब तक केवल एक ही पदोन्नति मिल सकी है।
अन्य विभागों में निरस्त हो चुकी हैं पदोन्नतियां
इसी तरह के मामलों में उद्योग संचालनालय और सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन में चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में की गई पदोन्नतियों को निरस्त किया जा चुका है। वहां सीपीसीटी, हिंदी-अंग्रेजी टाइपिंग और अन्य अनिवार्य योग्यताओं के अभाव में पदोन्नति आदेश वापस लिए गए तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे।
2009 से अनिवार्य हैं ये योग्यताएं
सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्ष 2009 में प्रदेश के सभी विभागों में कंप्यूटरीकरण के बाद लिपिकीय पदों पर सीधी भर्ती और पदोन्नति के लिए सीपीसीटी, पीजीडीसीए तथा हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग को अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद से वर्ग-3 के लिपिकीय पदों के लिए इन योग्यताओं को आवश्यक माना जाता है।
नगर निगम का पक्ष
नगर निगम के अपर आयुक्त वरुण अवस्थी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “नगर निगम में पदोन्नति के समय सभी नियमों और पात्रता का ध्यान रखते हुए प्रक्रिया पूरी की गई है।”
> नोट: समाचार में नियमों के उल्लंघन संबंधी दावे सूत्रों और आरोपों पर आधारित हैं। नगर निगम प्रशासन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि पदोन्नति नियमानुसार की गई है। मामले में अंतिम स्थिति सक्षम प्राधिकारी या न्यायिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।





