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रेलवे ठेकों में भ्रष्टाचार पर CBI का बड़ा शिकंजा: एक लाख की रिश्वत से खुली करोड़ों की संपत्ति की परतें

भोपाल/जबलपुर। भारतीय रेलवे में निर्माण कार्यों और ठेकों से जुड़े भुगतान तंत्र पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पश्चिम मध्य रेलवे के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) को कथित रूप से एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान भारी मात्रा में नकदी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने से मामला केवल रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी निर्माण परियोजनाओं में व्याप्त संभावित भ्रष्टाचार की गहरी परतों की ओर संकेत करता है।

एक लाख की रिश्वत, लेकिन मामला करोड़ों के भुगतान से जुड़ा

CBI के अनुसार, मामला एक रेलवे ठेकेदार की शिकायत से शुरू हुआ। आरोप है कि रेलवे अधिकारी ने सुरक्षा जमा राशि (Security Deposit), लंबित बिलों और मूल्य परिवर्तन (PVC) से संबंधित लगभग एक करोड़ रुपये के भुगतान जारी करने के बदले रिश्वत की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद एजेंसी ने सागर में जाल बिछाया और अधिकारी को कथित रूप से एक लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी निर्माण परियोजनाओं में भुगतान की प्रक्रिया अक्सर ठेकेदारों के लिए सबसे संवेदनशील चरण होती है। यदि भुगतान जारी करने की शक्ति रखने वाले अधिकारियों द्वारा अनुचित लाभ की मांग की जाती है, तो इसका सीधा असर परियोजनाओं की लागत, गुणवत्ता और समयसीमा पर पड़ता है।

नकदी और निवेश दस्तावेजों ने बढ़ाई जांच की गंभीरता

गिरफ्तारी के बाद की गई तलाशी में अधिकारी के ठिकानों से नकदी और अचल संपत्ति निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए। यह बरामदगी अब जांच को संभावित आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) और वित्तीय लेन-देन की दिशा में भी ले जा सकती है। CBI फिलहाल दस्तावेजों की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद संपत्ति का स्रोत क्या है।

रेलवे परियोजनाओं में भ्रष्टाचार क्यों बनता है बड़ा खतरा?

रेलवे देश के सबसे बड़े सार्वजनिक अवसंरचना नेटवर्क में से एक है। हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये के निर्माण, विद्युतीकरण, ट्रैक विस्तार और स्टेशन विकास कार्यों पर खर्च किए जाते हैं। ऐसे में यदि भुगतान, ठेका आवंटन या गुणवत्ता प्रमाणन जैसी प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार प्रवेश करता है, तो उसका प्रभाव केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं रहता।

विशेषज्ञों के अनुसार इसके तीन प्रमुख परिणाम होते हैं:

परियोजनाओं की लागत कृत्रिम रूप से बढ़ जाती है।

गुणवत्ता से समझौता होने का जोखिम बढ़ता है।

ईमानदार ठेकेदार प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाते हैं।


हाल के वर्षों में रेलवे अधिकारियों पर बढ़ी कार्रवाई

यह घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में CBI ने रेलवे से जुड़े कई अधिकारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी और ठेका अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई की है। मार्च 2026 में भी एक वरिष्ठ रेलवे इंजीनियर को कथित रूप से रेलवे टेंडर से जुड़े रिश्वत प्रकरण में गिरफ्तार किया गया था, जहां तलाशी के दौरान करोड़ों रुपये मूल्य की नकदी और आभूषण बरामद किए गए थे।

इससे यह संकेत मिलता है कि रेलवे निर्माण और खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है।

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