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रबी सीजन में खाद की बिक्री पिछले साल से 13% कम

28 अक्टूबर तक 4.16 लाख टन उर्वरक बिका, 8.14 लाख टन की उपलब्धता

भोपाल। रबी सीजन 2026-27 में प्रदेश में उर्वरकों की बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 13 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ की 29 अक्टूबर की दैनिक रिपोर्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2026 तक प्रदेश में 4.16 लाख टन उर्वरकों की बिक्री हुई। इस अवधि में उर्वरकों की कुल उपलब्धता 8.14 लाख टन रही, जबकि 3.98 लाख टन खाद शेष है। रिपोर्ट के अनुसार, यूरिया की बिक्री 2.40 लाख टन रही। पिछले साल इसी अवधि में 2.82 लाख टन यूरिया बिका था। इस तरह इसकी बिक्री में 15 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। डीएपी और टीएसपी की संयुक्त बिक्री 1.41 लाख टन रही, जो पिछले साल की समान अवधि के 1.11 लाख टन से 27 प्रतिशत अधिक है।

एनपीके उर्वरक की बिक्री में 64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस सीजन में 28 अक्टूबर तक 0.29 लाख टन एनपीके बिका, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 0.80 लाख टन की बिक्री हुई थी। पोटाश की बिक्री में 79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, सिंगल सुपर फॉस्फेट की बिक्री पिछले साल की तुलना में 48 प्रतिशत कम रही।

रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, 1 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक उर्वरकों की उपलब्धता और बिक्री में अलग-अलग श्रेणियों में अंतर रहा। यूरिया और अन्य खादों की बिक्री का रुझान भी अलग-अलग रहा है।

भोपाल में यूरिया की बिक्री 19% बढ़ी

भोपाल जिले में 28 अक्टूबर तक 5,022 टन यूरिया की बिक्री दर्ज की गई। पिछले साल इसी अवधि में 4,213 टन यूरिया बिका था। इस तरह जिले में यूरिया की बिक्री में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। डीएपी, टीएसपी और एनपीके की संयुक्त बिक्री के आंकड़े भी रिपोर्ट में अलग से दर्ज हैं।

आंकड़ों पर एक नजर

– कुल उर्वरक बिक्री: 4.16 लाख टन
– कुल उपलब्धता: 8.14 लाख टन
– शेष उर्वरक: 3.98 लाख टन
– कुल बिक्री में पिछले साल के मुकाबले बदलाव: 13 प्रतिशत की कमी

इनका कहना है
जिनकी भूमि है उनका पंजीयन हो रहा है और उनको जरुरत के अधार पर दिया जा रहा है. पिछले वर्ष बिना पंजीयन और आधार नंबर से उर्वरक का वितरण होता था. तो ज्यादा बिक्री हो जाती थी. इसलिए बिक्री का आंकड़ा कम आया है.
बी एस खेड़ेकर, जनरल मैनेजर, मार्कफेड

पहले किसान एक बोरी की जरूरत होने के बावजूद किल्लत की आशंका में चार बोरियां तक खरीद लेते थे। अब टोकन के जरिए जरूरत के अनुसार खाद मिलने से घबराहट में अतिरिक्त खरीदारी का चलन कम हुआ है। इससे किसानों को फायदा मिल रहा है। विभाग को उम्मीद है कि आगे खाद की बिक्री के आंकड़े भी सामान्य स्थिति के अनुरूप हो जाएंगे।
सुमन प्रसाद,डिप्टी डायरेक्टर

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