-शहर के विस्तार के साथ बढ़ेगी अंतिम संस्कार स्थलों तक पहुंचने की दूरी
-पुराने कब्रिस्तानों में भी जगह की कमी
भोपाल, 27 अक्टूबर. भोपाल मास्टर प्लान 2047 में शहर के विकास, आवासीय क्षेत्रों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का खाका तैयार किया गया है, लेकिन मुस्लिम और ईसाई समुदायों के कब्रिस्तानों तथा हिन्दु श्मशान घाटों के लिए नए स्थान तय करने का प्रावधान नहीं होने का मुद्दा सामने आया है. शहर की आबादी और बसाहट बढऩे के साथ अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध स्थानों की जरूरत भी बढ़ेगी. ऐसे में भविष्य की योजना में इन सुविधाओं को शामिल करना जरूरी माना जा रहा है. मास्टर प्लान में सडक़ों, आवासीय क्षेत्रों और अन्य सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई गई है. लेकिन लोगों की अंतिम यात्रा के बाद दफनाने या अंतिम संस्कार के लिए स्थानों की उपलब्धता भी शहर की बुनियादी जरूरतों में शामिल है. नए क्षेत्रों में आबादी बसने पर मौजूदा कब्रिस्तानों और श्मशान घाटों तक पहुंचने में लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है. इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों में इन सुविधाओं के लिए जगह सुरक्षित रखने की जरूरत है.
-हिंदू श्मशान घाटों के विकास की योजना भी नहीं
मास्टर प्लान 2047 में हिंदू श्मशान घाटों के निर्माण और मौजूदा श्मशान घाटों के विकास के लिए भी स्पष्ट प्रावधान नहीं किए गए हैं. नए मास्टर प्लान में शामिल अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में श्मशान घाट तो हैं, लेकिन वहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों के बैठने के लिए पार्क या व्यवस्थित स्थान, पक्का भवन, पेयजल और बिजली जैसी सुविधाओं की जरूरत है. इसके अलावा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी विकसित की जानी हैं. मास्टर प्लान में इन जरूरतों को शामिल नहीं किए जाने से भविष्य में शहर के विस्तार के साथ श्मशान घाटों पर सुविधाओं की कमी बनी रहने की आशंका है.
-पुराने कब्रिस्तानों में जगह की कमी
पुराने शहर में बड़ा बाग कब्रिस्तान, शाही कब्रिस्तान, जहांगीराबाद कब्रिस्तान, सिकंदरी सराय और नारियलखेड़ा सहित कई प्रमुख मुस्लिम कब्रिस्तान हैं. शहर की बढ़ती आबादी और पक्की कब्रें बनाए जाने के कारण कई कब्रिस्तानों में जगह की कमी की समस्या बताई जाती है. ऐसे में नई बसाहटों के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है. मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में भोपाल के 149 मुस्लिम कब्रिस्तान दर्ज होने की जानकारी दी जाती है. जिनमें से अधिकतर कब्रिस्तानों पर अतिक्रमण हो चुका है या फिर पक्की कब्रों का निर्माण होने से जगह की कमी हो चुकी है. इस वजह से अधिकतर कब्रिस्तान अस्तित्व में नहीं हैं.
-ईसाई समुदाय के लिए भी नए स्थान की जरूरत
ईसाई समुदाय के प्रमुख कब्रिस्तानों में हलालपुरा-लालघाटी, भदभदा कैथोलिक कब्रिस्तान और पुतलीघर स्थित कब्रिस्तान शामिल हैं. शहर का विस्तार होने पर नए आवासीय क्षेत्रों से इन स्थानों की दूरी बढ़ सकती है. ऐसे में भविष्य की जरूरत के अनुसार नए कब्रिस्तानों के लिए जगह तय करने की मांग महत्वपूर्ण हो जाती है. राजधानी में पारसी समुदाय का पारसी बाग कब्रिस्तान भी जहांगीराबाद क्षेत्र में स्थित है. शहर के नियोजित विकास में सभी समुदायों की अंतिम संस्कार संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कब्रिस्तानों और श्मशान घाटों के लिए स्थान सुरक्षित करने पर विचार किया जाना चाहिए. इससे भविष्य में जमीन की कमी और दूरस्थ स्थानों तक पहुंचने की परेशानी को कम किया जा सके.
