एम्स भोपाल में जबड़े के कैंसर की सर्जरी की डिजिटल प्लानिंग पर पहली कार्यशाला

100 से अधिक चिकित्सकों ने लिया हिस्सा, 3डी प्रिंटिंग और रोबोटिक सर्जरी का प्रशिक्षण; मरीजों के चेहरे की बनावट, चबाने और बोलने की क्षमता बहाल करने पर जोर

भोपाल। मुख कैंसर के कारण जबड़े का हिस्सा गंवा चुके मरीजों का चेहरा दोबारा बनाने और उनकी चबाने व बोलने की क्षमता बहाल करने के लिए एम्स भोपाल में पहली बार वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग पर सीएमई और हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 100 से अधिक चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। दो दिवसीय कार्यक्रम में डिजिटल तकनीक की मदद से जबड़े के पुनर्निर्माण, डेंटल इम्प्लांट और रोबोटिक सर्जरी सिमुलेशन का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला का विषय फिबुला फ्री फ्लैप और डेंटल इम्प्लांट के जरिए जबड़े के पुनर्निर्माण की डिजिटल योजना बनाना था। फिबुला फ्री फ्लैप तकनीक में पैर की निचली हड्डी का एक हिस्सा लेकर जबड़े का पुनर्निर्माण किया जाता है। कार्यक्रम का आयोजन एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, दंत चिकित्सा, बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभागों ने संयुक्त रूप से किया।

उद्घाटन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (सेवानिवृत्त) और एम्स दरभंगा के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने किया।

सर्जरी से पहले डिजिटल योजना पर जोर

कार्यपालक निदेशक डॉ. नरेंद्र कोतवाल ने कहा कि मुख कैंसर के मरीजों के लिए केवल जीवन बचाना ही नहीं, बल्कि चेहरे की बनावट और चबाने-बोलने की क्षमता लौटाना भी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, वर्चुअल सर्जिकल प्लानिंग से सर्जनों को ऑपरेशन की अधिक सटीक तैयारी करने में मदद मिल सकती है।

मुख्य व्याख्यान में प्रो. माधवानंद कर ने सिर और गर्दन के कैंसर की सर्जरी में डिजिटल तकनीक की बढ़ती भूमिका पर बात की। वैज्ञानिक सत्रों में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने जबड़े के पुनर्निर्माण, रेडियोथेरेपी के प्रभाव और कृत्रिम दांत लगाने की योजना पर विचार साझा किए।

ऑस्ट्रेलिया के रॉयल डार्विन हॉस्पिटल के डॉ. रजनीकांत जानकीरामन ऑनलाइन जुड़े। सीएमसी वेल्लोर के प्रो. आई. राजेश ने पुनर्निर्मित जबड़े की हड्डी के जुड़ने और डेंटल इम्प्लांट पर रेडियोथेरेपी के प्रभाव की जानकारी दी। टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने फिबुला फ्लैप के डिजिटल नियोजन और भविष्य में लगाए जाने वाले कृत्रिम दांतों को ध्यान में रखकर जबड़े की संरचना तैयार करने के तरीकों पर चर्चा की।

3डी प्रिंटिंग और रोबोटिक सर्जरी का अभ्यास

कार्यशाला के व्यावहारिक सत्रों में डॉ. भास्कर अग्रवाल के मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने प्रभावित जबड़े को हटाने, उसके पुनर्निर्माण, सर्जिकल गाइड तैयार करने और डेंटल इम्प्लांट की डिजिटल प्लानिंग का अभ्यास किया। उन्हें 3डी प्रिंटिंग की प्रक्रिया भी दिखाई गई।

एम्स की सुश्रुत स्किल्स लैब में रोबोटिक सर्जरी सिमुलेशन और लैप्रोस्कोपिक एंडोट्रेनर के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। पैनल चर्चा में जबड़े का पुनर्निर्माण उसी ऑपरेशन के दौरान करने या बाद में करने और डेंटल इम्प्लांट लगाने के तरीकों पर विचार किया गया।

आयोजकों के मुताबिक, कार्यशाला का उद्देश्य मुख कैंसर के मरीजों के उपचार में डिजिटल प्लानिंग के उपयोग को बढ़ावा देना है, ताकि जबड़े के पुनर्निर्माण के साथ मरीजों की दैनिक गतिविधियों और जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके।

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