भोपाल। एम्स भोपाल में कैंसर मरीजों की दंत एवं मौखिक समस्याओं के बेहतर इलाज और चेहरे-जबड़े के पुनर्वास के लिए विशेष दंत एवं कृत्रिम ऑन्कोलॉजी क्लिनिक शुरू किया गया है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दंत चिकित्सा विभाग में इस क्लिनिक का शुभारंभ किया गया।
क्लिनिक का उद्देश्य सिर एवं गर्दन के कैंसर का उपचार करा रहे मरीजों तथा एंटी-रिसॉर्प्टिव और एंटी-एंजियोजेनिक दवाएं ले रहे मरीजों को एक ही स्थान पर दंत चिकित्सा, मौखिक जटिलताओं की रोकथाम और उपचार के साथ चेहरे एवं जबड़े के कृत्रिम पुनर्वास की सुविधा देना है।
रेडियोथेरेपी से पहले होगी दंत जांच
कैंसर के उपचार के दौरान होने वाली मौखिक समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार के लिए मरीजों की रेडियोथेरेपी शुरू होने से पहले दंत जांच की जाएगी। क्लिनिक में म्यूकोसाइटिस, मुंह का सूखापन, मुंह खुलने में कमी और ऑस्टियोरेडियोनेक्रोसिस जैसी जटिलताओं का प्रबंधन किया जाएगा।
इसके अलावा दवाओं के कारण जबड़े की हड्डी को होने वाले नुकसान एमआरओएनजे की रोकथाम और उपचार की सुविधा भी मिलेगी। कैंसर का उपचार पूरा होने के बाद जरूरत के अनुसार चेहरे और जबड़े से संबंधित कृत्रिम पुनर्वास भी किया जाएगा।
कई विभागों के समन्वय से होगा संचालन
क्लिनिक का संचालन मेडिकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी/ईएनटी और पैलिएटिव केयर विभागों के समन्वय से किया जाएगा। क्लिनिक प्रत्येक गुरुवार दोपहर 2:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक संचालित होगा। क्लिनिक का पंजीकरण दंत चिकित्सा विभाग की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. गुंजन चौकसे के नाम से किया गया है।
कार्यक्रम में एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर, डीन (शैक्षणिक) प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता, उपनिदेशक (प्रशासन) संदेश कुमार जैन, अधीक्षण अभियंता डॉ. राघवेंद्र विदुआ और दंत चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) पंकज गोयल सहित अधिकारी एवं संकाय सदस्य मौजूद रहे।
कैंसर मरीजों के समग्र उपचार में मदद
एम्स भोपाल के अनुसार, यह पहल कैंसर मरीजों की दंत और मौखिक देखभाल को उनके समग्र उपचार का हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। क्लिनिक से उपचार के दौरान होने वाली मौखिक जटिलताओं की रोकथाम और समय पर उपचार में मदद मिलेगी। साथ ही उपचार के बाद चेहरे और जबड़े के कार्यात्मक एवं कृत्रिम पुनर्वास को भी बेहतर किया जा सकेगा।
यह क्लिनिक दंत ऑन्कोलॉजी और मैक्सिलोफेशियल प्रोस्थेटिक्स के क्षेत्र में एम्स भोपाल की क्लिनिकल, शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों को भी मजबूत करेगा।
