स्मार्ट कूलिंग तकनीक से शहर का तापमान 3 से 4 डिग्री तक घटाने की संभावना, विश्व पर्यावरण दिवस पर हुई चर्चा
भोपाल, 5 जून 2026। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान की चुनौतियों से निपटने के लिए शहरों को अब स्मार्ट कूलिंग सर्फेसेस (Smart Cooling Surfaces) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता है। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि शहरों के मास्टर प्लान में स्मार्ट सर्फेसेस बेनेफिट-कॉस्ट एनालिसिस को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि विकास परियोजनाओं में तापमान नियंत्रण और पर्यावरणीय स्थिरता को प्राथमिकता दी जा सके।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सदर मंजिल में आयोजित “भोपाल सिटी वाइड स्मार्ट सरफेसेस फॉर कॉस्ट इफेक्टिव कूलिंग एंड रेजिलिएंस: इम्प्रूविंग हेल्थ, लिवेबिलिटी, एजुकेशन एंड प्रोडक्टिविटी वाइल कटिंग ग्लोबल वार्मिंग” विषयक कार्यक्रम में उन्होंने यह विचार व्यक्त किए।
लॉन्च हुआ स्मार्ट सर्फेसेस बेनेफिट-कॉस्ट एनालिसिस टूल
कार्यक्रम के दौरान स्मार्ट कूलिंग सर्फेसेस से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स के लिए विकसित वेब-आधारित स्मार्ट सर्फेसेस बेनेफिट-कॉस्ट एनालिसिस टूल का भी शुभारंभ किया गया। यह टूल विभिन्न परियोजनाओं में स्मार्ट कूलिंग तकनीकों के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों का आकलन करने में मदद करेगा।
इस कार्यक्रम का आयोजन The Energy and Resources Institute (TERI) और Bhopal Smart City Development Corporation द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
पारंपरिक निर्माण तकनीकों से सीखने की जरूरत
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण शहरों का तापमान लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में भवन निर्माण में चूना, मिट्टी और प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता था, जिससे घरों और भवनों का तापमान नियंत्रित रहता था। इसके विपरीत वर्तमान समय में कंक्रीट आधारित निर्माण तेजी से बढ़ा है, जिससे शहरी क्षेत्रों में हीट आइलैंड प्रभाव और तापमान वृद्धि की समस्या गंभीर होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि आधुनिक तकनीकों को पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़ा जाए तो शहरों को अधिक रहने योग्य और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।
एआई सिटी, आईटी सिटी और एजुकेशन सिटी में होगा उपयोग
कलेक्टर ने बताया कि भोपाल में विकसित की जा रही एआई सिटी, आईटी सिटी और एजुकेशन सिटी जैसी नई परियोजनाओं में स्मार्ट कूलिंग सर्फेसेस तकनीक को शामिल किया जा सकता है। उनके अनुसार इन तकनीकों के उपयोग से स्थानीय तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कमी लाई जा सकती है, जिससे ऊर्जा की बचत, नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार और जीवन गुणवत्ता में वृद्धि होगी।
नागरिकों तक पहुंचाई जाएगी तकनीक की जानकारी
कार्यक्रम में भोपाल स्मार्ट सिटी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंजू अरुण कुमार ने कहा कि स्मार्ट कूलिंग सर्फेसेस के क्षेत्र में भोपाल स्मार्ट सिटी और टेरी मिलकर कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य इस तकनीक के लाभों और उपयोगिता की जानकारी आम नागरिकों, संस्थानों और विकास एजेंसियों तक पहुंचाना है, ताकि भविष्य के शहरी विकास में इसे प्रभावी रूप से अपनाया जा सके।
जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट कूलिंग सर्फेसेस, रिफ्लेक्टिव रूफ, कूल पेवमेंट, हरित क्षेत्र और ऊर्जा-कुशल निर्माण सामग्री जैसे उपाय भविष्य के शहरों को अधिक टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भोपाल में शुरू हुई यह पहल न केवल शहर के तापमान को नियंत्रित करने में सहायक होगी, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, उत्पादकता और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगी।
भोपाल के मास्टर प्लान में शामिल हों स्मार्ट कूलिंग सर्फेसेस: कलेक्टर प्रियंक मिश्रा
