संत समाज ने उठाई गोहद की विरासत की आवाज, क्या श्रीकृष्ण गमन पथ से जुड़ेगा चंबल का ऐतिहासिक नगर?
“गौ-हद धाम” अभियान को मिला संतों का समर्थन, धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने की मांग तेज
गोहद/भिंड। चंबल अंचल के ऐतिहासिक नगर गोहद को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित करने की मांग अब व्यापक स्वरूप ले रही है। “गौ-हद धाम अभियान” को संत समाज का समर्थन मिलने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। संतों ने गोहद की प्राचीन परंपराओं, वैष्णव संस्कृति और धार्मिक महत्व को सामने लाते हुए इसे संरक्षण और पहचान दिलाने की आवश्यकता बताई है।
खनेता धाम स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ जी मंदिर के महंत महामंडलेश्वर परम पूज्य रामभूषण दास जी महाराज ने कहा कि गोहद केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं, संत संस्कृति और लोक आस्था का केंद्र रहा है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों में गोहद का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की गौ-लीला परंपरा से जोड़ा जाता है। इसी धार्मिक भावभूमि के कारण गोहद को “गौ-हद” यानी गौओं के गोचारण क्षेत्र की सीमा के रूप में स्मरण किया जाता है।
वैष्णव परंपरा और प्राचीन मंदिरों की समृद्ध विरासत
महंत रामभूषण दास जी ने कहा कि गोहद क्षेत्र में मौजूद प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल यहां की आध्यात्मिक समृद्धि के प्रमाण हैं। राजगुरु की जग्गा, कालिया कंठ की जग्गा, रघुनाथ जी की जग्गा, मदनमोहन जी की जग्गा, नरसिंह जी मंदिर और लक्ष्मण जी मंदिर जैसे धार्मिक स्थल क्षेत्र की पुरानी वैष्णव परंपरा को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि इन धरोहरों का संरक्षण केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
श्रीकृष्ण गमन पथ में गोहद को शामिल करने की मांग
महंत श्री ने मध्यप्रदेश शासन से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा प्रस्तावित श्रीकृष्ण गमन पथ योजना में गोहद को शामिल करने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मथुरा और वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के प्रमुख केंद्र हैं, उसी प्रकार चंबल क्षेत्र की लोक परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं भी अध्ययन एवं संरक्षण की पात्र हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने साझा की अभियान की रूपरेखा
गौ-हद धाम अभियान से जुड़े प्रतिनिधिमंडल ने महंत श्री रामभूषण दास जी महाराज से मुलाकात कर अभियान के उद्देश्य और भविष्य की योजना पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने गोहद को आसपास के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों से जोड़कर एक सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट विकसित करने का प्रस्ताव रखा।
इसमें गोहद के साथ मितावली मंदिर, पढ़ावली मंदिर, काकनमठ मंदिर, शनिधाम, कुंतलपुर और कर्ण कुंड जैसे स्थलों को जोड़ने की बात कही गई।
महंत श्री ने अभियान को आशीर्वाद देते हुए कहा कि अपनी जन्मभूमि और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपनी ऐतिहासिक पहचान को बचाने के लिए आगे आने का आह्वान किया।
जनप्रतिनिधियों तक पहुंची मांग, बढ़ रही जनभागीदारी
गौरतलब है कि गोहद को “गौ-हद धाम” के रूप में विकसित करने और श्रीकृष्ण गमन पथ से जोड़ने की मांग को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रयास तेज हुए हैं। अभियान से जुड़े लोगों ने क्षेत्रीय विधायक केशव देसाई को भी इस संबंध में प्रतिवेदन सौंपा है।
विधायक द्वारा इस विषय को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने के आश्वासन के बाद क्षेत्र में इस मांग को लेकर नई उम्मीद जगी है।
चंबल पूछ रहा है—क्या मिलेगी ऐतिहासिक पहचान?
अब चंबल अंचल में यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि क्या गोहद को उसकी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप पहचान मिल पाएगी? क्या श्रीकृष्ण गमन पथ के माध्यम से चंबल की यह प्राचीन धरोहर देश के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर स्थान बना सकेगी?
गौ-हद धाम अभियान अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृति और विरासत संरक्षण से जुड़ा जनअभियान बनता दिखाई दे रहा है।
गौ-हद धाम को मिले सम्मान
चंबल की विरासत को मिले नई पहचान
श्रीकृष्ण गमन पथ में गोहद को मिले स्थान