शासन ने 2010 में निरस्त कर दी थी लिपिक से स्टेनोग्राफर पदोन्नति, कार्रवाई अब तक लंबित; ईओडब्ल्यू में भी हो चुकी है शिकायत
भोपाल। भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) में एक कर्मचारी की पदोन्नति को लेकर वर्षों पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया है। आरोप है कि जगदीश करंजिया करीब 18 वर्षों से मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय में स्टेनोग्राफर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी पदोन्नति को लेकर शासन स्तर पर वर्ष 2010 में आपत्ति दर्ज करते हुए आदेश निरस्त किया जा चुका था।
दस्तावेजों के अनुसार, तत्कालीन बीडीए सीईओ द्वारा वर्ष 2007 में लिपिक पद पर कार्यरत जगदीश करंजिया को स्टेनोग्राफर पद पर पदोन्नत किया गया था। इस पदोन्नति आदेश की वैधानिकता पर सवाल उठने के बाद मामला शासन के पास भेजा गया, जहां से इसे निरस्त कर दिया गया था।
सीईओ के आदेश से हुई थी पदोन्नति
जानकारी के अनुसार, बीडीए के तत्कालीन सीईओ ने 1 जुलाई 2007 को आदेश जारी कर जगदीश करंजिया को लिपिक पद से स्टेनोग्राफर पद पर पदोन्नत किया था।
आरोप है कि यह आदेश जारी करने का अधिकार सीईओ के पास नहीं था। बीडीए आवास एवं पर्यावरण विभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए पदोन्नति से जुड़े नियम और निर्णय शासन स्तर पर तय किए जाते हैं।
इसके बाद पदोन्नति संबंधी मामला शासन को भेजा गया, जहां तत्कालीन उप सचिव रामेश्वर गुप्ता ने मार्च 2010 में पदोन्नति आदेश को निरस्त कर दिया था।
शासन ने नियमों के अनुरूप नहीं माना था आदेश
शासन के आदेश में उल्लेख किया गया था कि 20 मई 1996 को जारी अधिसूचना के अनुसार इस प्रकार की पदोन्नति करने का अधिकार मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नहीं है। इसलिए तत्कालीन पदोन्नति आदेश को नियमों के अनुरूप नहीं मानते हुए निरस्त किया गया।
शासन ने यह भी निर्देश दिए थे कि जब तक शासन स्तर से कोई नया निर्णय नहीं होता, तब तक पूर्व स्थिति बनाए रखी जाए और भविष्य में इस प्रकार की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाए।
हालांकि आरोप है कि शासन का यह पत्र बीडीए कार्यालय पहुंचने के बाद भी प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया और जगदीश करंजिया लगातार स्टेनोग्राफर पद पर कार्य करते रहे।
ईओडब्ल्यू में भी की गई थी शिकायत
इस मामले में भोपाल निवासी लवन दास सिंह ने 26 फरवरी 2015 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में शिकायत की थी।
शिकायत पर तत्कालीन सहायक महानिरीक्षक अपराध ने 12 अगस्त 2015 को नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर वैधानिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। हालांकि इसके बाद मामले में आगे की कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
पदोन्नति निरस्त होने पर वेतन-भत्तों की वसूली का सवाल
जगदीश करंजिया 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में यदि बीडीए उनकी पदोन्नति को निरस्त करता है तो पिछले वर्षों में स्टेनोग्राफर पद के आधार पर प्राप्त वेतन और अन्य सुविधाओं की वसूली का मुद्दा भी उठ सकता है।
मामले में यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि शासन द्वारा वर्ष 2010 में भेजा गया पत्र लागू क्यों नहीं किया गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी थी।
सीईओ ने कहा- मामला संज्ञान में आया है, नियमानुसार कार्रवाई होगी
भोपाल विकास प्राधिकरण के सीईओ श्यामवीर सिंह ने कहा कि यह पुराना मामला है और उनकी जानकारी में पहले नहीं था। अब मामला संज्ञान में आया है, नियमानुसार जो उचित कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।
अब देखना होगा कि बीडीए इस पुराने प्रकरण में शासन के आदेशों के आधार पर क्या कदम उठाता है और जिम्मेदारी तय करने के लिए कोई जांच की जाती है या नहीं।