विपक्ष/आलोचकों का सवाल—क्या मुख्यमंत्री की यात्रा के लिए NGT के आदेश से कोई विशेष अनुमति थी? अनुमति थी तो सार्वजनिक करने की मांग
भोपाल। स्वतंत्रता दिवस से पहले भोपाल के बड़े तालाब में आयोजित तिरंगा यात्रा को लेकर अब पर्यावरण और नियमों के पालन का सवाल उठ रहा है। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री की नाव के साथ सुरक्षा व्यवस्था में लगी मोटर बोट के इस्तेमाल को लेकर आलोचकों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं।
आलोचकों का दावा है कि NGT के 2023 के आदेश में बड़े तालाब में मोटर से चलने वाली नावों के संचालन पर रोक से संबंधित निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि तिरंगा यात्रा के दौरान मोटर बोट के संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई थी।
तिरंगा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के साथ सुरक्षा में तैनात जवानों की मोटर बोट भी तालाब में नजर आने की बात कही जा रही है। इसी को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि यदि आम लोगों के लिए बड़े तालाब में मोटर बोट के संचालन पर पर्यावरणीय नियम लागू हैं, तो सरकारी कार्यक्रम में इन नियमों का पालन किस तरह किया गया।
आलोचकों ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या इस आयोजन के लिए NGT के आदेश के तहत कोई विशेष अनुमति, अपवाद या वैधानिक प्रावधान मौजूद था। यदि अनुमति ली गई थी, तो उसे सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
हालांकि, उपलब्ध आरोपों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि NGT के आदेश का उल्लंघन हुआ ही है। इसके लिए संबंधित आदेश की सटीक शर्तों, मोटर बोट के संचालन पर लागू प्रावधानों और कार्यक्रम के लिए जारी अनुमति की पुष्टि जरूरी है।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़े तालाब के संरक्षण और पर्यावरणीय नियमों को लेकर लंबे समय से प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर निर्देश दिए जाते रहे हैं। ऐसे में सवाल केवल एक कार्यक्रम का नहीं, बल्कि क्या नियम सभी के लिए समान हैं और सरकारी आयोजनों में भी उनका पूरी तरह पालन होता है, इसका है।
