मास्टर प्लान 2047 पर दो जगह विरोध -छावनी पठार में 5700 परिवारों की चिंता, खानूगांव को आवासीय क्षेत्र बनाने की मांग

-छावनी पठार के आठ खसरों को औद्योगिक उपयोग पर आपत्ति
-खानूगांव के रहवासियों ने ग्रीन बेल्ट में शामिल करने पर जताई नाराजगी

भोपाल, 26 अक्टूबर. भोपाल विकास योजना 2047 के प्रारूप को लेकर विरोध और आपत्तियों का सिलसिला जारी है. छावनी पठार में आठ खसरों को औद्योगिक उपयोग में शामिल करने के प्रस्ताव का ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने विरोध किया है. वहीं खानूगांव के रहवासियों ने अधिकांश क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट में शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे आवासीय क्षेत्र घोषित करने की मांग की है. दोनों मामलों में लोगों ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से स्थानीय आबादी और मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान में बदलाव करने का अनुरोध किया है.
-छावनी पठार के आठ खसरों को औद्योगिक उपयोग से हटाने की मांग
ग्राम पंचायत छावनी पठार और ग्रामीणों ने प्रस्तावित मास्टर प्लान में खसरा क्रमांक 42, 44, 45, 46, 64, 66, 67 और 73 को औद्योगिक उपयोग में शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कराई है. ग्रामीणों के अनुसार, इन क्षेत्रों में लगभग 5700 परिवार लंबे समय से निवास कर रहे हैं. औद्योगिक भू-उपयोग लागू होने से उनके घरों और भविष्य पर असर पडऩे की आशंका है. ग्राम पंचायत ने इस संबंध में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग कार्यालय में आवेदन दिया है. पंचायत के अनुसार 2 अक्टूबर को आयोजित ग्रामसभा में भी प्रस्तावित भू-उपयोग के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया था. ग्रामीणों की मांग है कि इन आठ खसरों को औद्योगिक क्षेत्र से हटाकर आवासीय क्षेत्र में शामिल किया जाए. सरपंच प्रतिनिधि वीर सिंह राजपूत के अनुसार ग्रामीण विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन वर्षों से बसे परिवारों के हितों की रक्षा भी जरूरी है. पंचायत ने शासन-प्रशासन से स्थानीय आबादी और जनहित को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की मांग की है.
-215 साल पुरानी खानूगांव बस्ती को आवासीय दर्जा देने की मांग
खानूगांव (कोहेफिजा) के रहवासियों ने मास्टर प्लान 2047 के प्रारूप में अधिकांश क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है. संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश विभाग को दिए गए आवेदन में उन्होंने क्षेत्र को आवासीय श्रेणी में शामिल करने की मांग की है. रहवासियों का कहना है कि खानूगांव लगभग 215 साल पुरानी बस्ती है. यहां बड़ी संख्या में मकान बने हैं और लोग लंबे समय से रह रहे हैं. क्षेत्र में सडक़, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं. आवेदन में मोजवेलैंड द्वारा बनाए गए पंपिंग स्टेशन का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इस पर शासन ने करोड़ों रुपये खर्च किए हैं. रहवासियों ने दावा किया है कि वर्ष 1978 की विकास योजना में संबंधित क्षेत्र को आवासीय उपयोग के लिए दर्शाया गया था. ऐसे में नए प्रारूप में अधिकांश हिस्से को ग्रीन बेल्ट में शामिल किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं.
-पुराने रिकॉर्ड के आधार पर बदलाव की मांग
खानूगांव के रहवासियों ने राजस्व अभिलेखों और पुराने मानचित्रों का हवाला देते हुए तालाब के कैचमेंट क्षेत्र से 50 मीटर का हिस्सा छोडक़र शेष क्षेत्र को आवासीय उपयोग में रखने का अनुरोध किया है. उन्होंने आवेदन के साथ पुराने मानचित्र और संबंधित दस्तावेज भी जमा किए हैं. ग्रामीणों और रहवासियों की मांग है कि मास्टर प्लान को अंतिम रूप देते समय मौजूदा बस्तियों, पुराने अभिलेखों और लोगों के हितों को ध्यान में रखा जाए.

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