बड़े तालाब कैचमेंट मामले में निगमायुक्त सख्त, दो इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस

रिकॉर्ड में अंतर के बावजूद आपत्ति दर्ज नहीं कराने और एनजीटी में निगम का पक्ष नहीं रखने पर कार्रवाई

भोपाल। बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों के मामले में नगर निगम प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बिल्डिंग परमिशन शाखा में पदस्थ सहायक यंत्री प्रदीप कुमार जाडिया और झील संरक्षण प्रकोष्ठ के तत्कालीन सहायक यंत्री आदित्य खरे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में चल रही कार्रवाई के दौरान रिकॉर्ड में सामने आए अंतर को लेकर उन्होंने समय पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई और संबंधित मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच के समक्ष नगर निगम का पक्ष प्रभावी तरीके से प्रस्तुत नहीं किया।

सीमांकन के दौरान सामने आया रिकॉर्ड में अंतर

मामला बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई से जुड़ा है। एनजीटी के निर्देशों के बाद नगर निगम द्वारा कैचमेंट क्षेत्र में बने अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

कार्रवाई के दौरान कुछ प्रभावित लोगों ने राजस्व विभाग से दोबारा सीमांकन कराने की मांग की थी। सीमांकन के दौरान राजस्व अमले द्वारा तैयार पंचनामे में दर्ज जानकारी और झील संरक्षण प्रकोष्ठ के रिकॉर्ड में अंतर सामने आया।

आरोप है कि दोनों सहायक यंत्रियों को इस अंतर की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने न तो कोई आपत्ति दर्ज कराई और न ही रिकॉर्ड में सुधार के लिए प्रक्रिया अपनाई। इसके बजाय उन्होंने पंचनामे पर हस्ताक्षर कर दिए।

दो दिन में मांगा जवाब, एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी

नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने इसे अधिकारियों की लापरवाही मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में दोनों अधिकारियों से दो दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।

जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने या निर्धारित समय में जवाब नहीं देने पर उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

बड़े तालाब संरक्षण से जुड़े मामलों में एनजीटी के निर्देशों के चलते नगर निगम की कार्रवाई लगातार जारी है। ऐसे में अधिकारियों की भूमिका और रिकॉर्ड प्रबंधन को लेकर प्रशासन अब अधिक सतर्कता बरत रहा है।

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