
भोपाल। मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच ने राज्य सरकार पर स्थाई कर्मियों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। मंच का दावा है कि सरकार जहां संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और अतिथि शिक्षकों के वेतन में वृद्धि जैसे कदम उठा रही है, वहीं प्रदेश के करीब 32 हजार स्थाई कर्मियों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
मंच ने मांग की है कि स्थाई कर्मियों को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित किया जाए अथवा उन्हें सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए।
मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने कहा कि वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थाई कर्मी बनाते समय नियमितीकरण का आश्वासन दिया था। उनका आरोप है कि पिछले दस वर्षों से कर्मचारी केवल काल्पनिक वेतनमान और सीमित वेतन वृद्धि के आधार पर सेवा दे रहे हैं, जबकि न तो उनका नियमितीकरण किया गया और न ही वेतनमान में अपेक्षित परिवर्तन हुआ।
उन्होंने यह भी दावा किया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद स्थाई कर्मियों को अब तक सातवें वेतनमान का लाभ नहीं मिला है।
मंच ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थाई कर्मियों के नियमितीकरण या सातवें वेतनमान संबंधी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो मध्यप्रदेश कर्मचारी मंच कर्मचारियों के हित में आंदोलन शुरू करेगा।





