मंत्रालय कर्मचारी संघ ने पदोन्नति नियमों में एकमुश्त छूट की मांग उठाई, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजा आग्रह

भोपाल। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने प्रदेश में लंबे समय तक पदोन्नतियां प्रभावित रहने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से सितंबर 2026 तथा जनवरी 2027 में प्रस्तावित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकों के लिए अर्हताकारी सेवा (Qualifying Service) की अनिवार्यता में एकमुश्त छूट देने की मांग की है।

संघ का कहना है कि वर्तमान नियमों के अनुसार किसी अधिकारी या कर्मचारी को अगले पद पर पदोन्नति के लिए पात्र होने हेतु मौजूदा पद पर कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी करना आवश्यक है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) इस अवधि में छूट देने का निर्णय ले सकती है।

संघ के अनुसार प्रदेश में करीब 10 वर्षों तक पदोन्नतियां प्रभावित रहने के कारण असामान्य स्थिति उत्पन्न हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो गए, जबकि कई कर्मचारियों को वर्षों बाद पदोन्नति मिली। ऐसे में 2026 में पदोन्नत हुए अधिकारी-कर्मचारी आगामी सितंबर 2026 और जनवरी 2027 की डीपीसी में पांच वर्ष की अर्हताकारी सेवा पूरी नहीं होने के कारण अगली पदोन्नति के लिए विचारण क्षेत्र में नहीं आ पाएंगे।

संघ का तर्क है कि यह स्थिति कर्मचारियों की गलती से नहीं, बल्कि लंबे समय तक पदोन्नति प्रक्रिया बाधित रहने के कारण बनी है। इसलिए एक बार के लिए कैबिनेट के माध्यम से अर्हताकारी सेवा की शर्त में छूट देकर सभी पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम अगली पदोन्नति के लिए विचारण क्षेत्र में शामिल किए जाएं।

संघ का यह भी कहना है कि यदि यह निर्णय लिया जाता है तो वर्षों तक पदोन्नति नहीं मिलने से हुई क्षति की आंशिक भरपाई हो सकेगी। साथ ही उच्च पदों पर पदोन्नति होने से निचले पद रिक्त होंगे, जिन पर नई भर्तियां की जा सकेंगी और इससे प्रदेश के युवाओं को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

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