भोपाल। मध्य प्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ ने राज्य के सभी विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग उठाई है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चन्द्र शर्मा को मंत्रालय वल्लभ भवन में ज्ञापन सौंपकर सरकार से बिजली विभाग की तरह सभी 54 विभागों के संविदा कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण नीति बनाने की मांग की।
महासंघ ने बताया कि ऊर्जा विभाग ने हाल ही में बिजली कंपनियों के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नीति जारी की है। इसके तहत विभागीय पात्रता परीक्षा आयोजित होगी। परीक्षा में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों को 40 प्रतिशत तथा सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को 50 प्रतिशत अंक लाने होंगे। साथ ही सेवा के प्रत्येक वर्ष के अनुभव के आधार पर अधिकतम 30 अंक दिए जाएंगे। पात्र कर्मचारियों को विभाग के रिक्त नियमित पदों पर नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है।
महासंघ का कहना है कि इसी तरह की व्यवस्था राज्य के अन्य विभागों में भी लागू की जानी चाहिए। ज्ञापन में 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के स्थान पर नियमितीकरण नीति लागू करने की मांग की गई है।
महासंघ के अनुसार संविदा कर्मचारियों की भर्ती और कार्य नियमित कर्मचारियों की तरह ही होता है, लेकिन उन्हें अपेक्षाकृत काफी कम वेतन और सीमित सुविधाएं मिलती हैं। वहीं नियमित कर्मचारियों को वेतनवृद्धि, महंगाई भत्ता, पदोन्नति, आवास, चिकित्सा सुविधा, विभिन्न प्रकार के अवकाश और सेवानिवृत्ति लाभ जैसी सुविधाएं प्राप्त होती हैं।
महासंघ का कहना है कि संविदा कर्मचारी वर्षों तक एक ही पद और वेतन पर कार्य करते हुए सेवानिवृत्त हो जाते हैं। इसलिए सरकार को सभी विभागों के संविदा कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण की स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में रमेश सिंह, सतेंद्र सिंह परिहार, अनिल सिंह ठाकुर, अवध कुमार गर्ग और राजीव शर्मा भी शामिल रहे।
