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मानवता की प्रेरक मिसाल: एम्स भोपाल में 97 वर्षीय शिक्षाविद् राजेश्वर प्रसाद माहेश्वरी का देहदान, चिकित्सा शिक्षा को मिला अमूल्य योगदान

भोपाल। चिकित्सा शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करते हुए एम्स भोपाल में 97 वर्षीय प्रतिष्ठित शिक्षाविद् स्वर्गीय राजेश्वर प्रसाद माहेश्वरी का देहदान संपन्न हुआ। उनका यह निर्णय न केवल चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने वाला है, बल्कि समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला भी माना जा रहा है।

एम्स भोपाल के अनुसार, स्वर्गीय राजेश्वर प्रसाद माहेश्वरी ने लगभग डेढ़ वर्ष पहले अपनी इच्छा से देहदान का संकल्प लिया था और इसके लिए आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी कर दी थीं। उनके निधन के बाद उनके पुत्र विपिन कुमार माहेश्वरी, जो भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए देहदान की प्रक्रिया पूर्ण कराई।

राजकीय सम्मान के साथ एम्स पहुंचा पार्थिव शरीर

मध्यप्रदेश शासन द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार दिवंगत शिक्षाविद् को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ उनका पार्थिव शरीर एम्स भोपाल लाया गया।

इस अवसर पर एम्स भोपाल परिवार ने संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्होंने इस समाजोपयोगी और प्रेरणादायी कार्य में सहयोग दिया।

शिक्षा जगत में चार दशक से अधिक का योगदान

राजेश्वर प्रसाद माहेश्वरी ने चार दशकों से अधिक समय तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। वे देश के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के प्राचार्य भी रहे।

उन्होंने कानून और लेखाशास्त्र (अकाउंटेंसी) विषयों पर 50 से अधिक पाठ्यपुस्तकों का लेखन किया, जिनका उपयोग लंबे समय से वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की शिक्षा में किया जाता रहा है।

सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने लगभग 20 वर्षों तक जगन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (JIMS), दिल्ली के निदेशक के रूप में कार्य किया। इसके अलावा वे आईसीएआई (ICAI), आईसीएसआई (ICSI) और आईसीडब्ल्यूएआई (अब ICMAI) जैसे प्रमुख व्यावसायिक संस्थानों से भी लंबे समय तक जुड़े रहे। उन्होंने एक धर्मार्थ ट्रस्ट के माध्यम से समाजसेवा के कार्यों में भी सक्रिय योगदान दिया।

“देहदाता सर्वोच्च शिक्षक हैं”

एम्स भोपाल प्रशासन ने कहा कि देहदान केवल एक दान नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा की आधारशिला है। संस्थान प्रत्येक देहदाता को “सर्वोच्च शिक्षक” का सम्मान देता है, क्योंकि मेडिकल विद्यार्थी मानव शरीर की संरचना, शल्य चिकित्सा की मूलभूत तकनीकों और व्यावहारिक चिकित्सा कौशल का अध्ययन देहदान के माध्यम से ही करते हैं।

संस्थान का कहना है कि यही प्रशिक्षण भविष्य में चिकित्सकों को हजारों मरीजों के बेहतर उपचार में सक्षम बनाता है।

नागरिकों से देहदान के लिए आगे आने की अपील

एम्स भोपाल ने सभी नागरिकों से देहदान के महत्व को समझने, इसकी प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करने और इस समाजहितकारी अभियान से जुड़ने की अपील की है। संस्थान ने कहा कि देहदान चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाने के साथ-साथ भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में अमूल्य योगदान देता है।

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