भोपाल, 4 जुलाई
। राजधानी भोपाल के बड़े तालाब (भोजताल) के फुल टैंक लेवल (FTL) एवं एफटीएल से 50 मीटर की प्रतिबंधित परिधि में बने अवैध निर्माणों के खिलाफ जिला प्रशासन और नगर निगम ने शनिवार को संयुक्त कार्रवाई करते हुए छह अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के पालन में की गई।
प्रशासन के अनुसार, बड़े तालाब के एफटीएल और उससे 50 मीटर की परिधि को नो कंस्ट्रक्शन जोन घोषित किया गया है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में मकान, टीन शेड, बाउंड्रीवॉल और अन्य पक्के निर्माण कर लिए गए थे, जिन्हें हटाने के निर्देश एनजीटी द्वारा दिए गए थे।
इन क्षेत्रों में हुई कार्रवाई
संयुक्त कार्रवाई के दौरान ग्राम गोरा, ग्राम सेवनियां गौड़ और ग्राम बिशनखेड़ी में अवैध रूप से निर्मित छह निर्माणों को तोड़ा गया। इनमें पक्के मकान, टीन शेड, बाउंड्रीवॉल और पिलर शामिल हैं।
कार्रवाई के दौरान जिन प्रमुख निर्माणों को हटाया गया, उनमें शामिल हैं—
– ग्राम गोरा में अशोक बिलगैया द्वारा निर्मित मकान एवं बाउंड्रीवॉल।
– शांता दादलानी एवं परिवार द्वारा बनाई गई पक्की बाउंड्रीवॉल और पिलर।
– ग्राम सेवनियां गौड़ में गुड्डी बाई द्वारा निर्मित टीन शेड का मकान एवं बाउंड्रीवॉल।
– रॉबिंस ठाकुर द्वारा बनाई गई अवैध पक्की बाउंड्रीवॉल।
– ग्राम बिशनखेड़ी में विपिन चड्डा की अवैध बाउंड्रीवॉल।
– राजेश सराफ द्वारा निर्मित पक्का मकान एवं बाउंड्रीवॉल।
नोटिस और सुनवाई के बाद हुई कार्रवाई
नगर निगम ने बताया कि संबंधित निर्माणकर्ताओं को नियमानुसार तीन चरणों में नोटिस जारी किए गए थे तथा उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए विधिवत सुनवाई का पूरा अवसर भी दिया गया। इसके बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाए गए। इसके बाद जिला प्रशासन और नगर निगम ने संयुक्त रूप से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सख्ती
मध्यप्रदेश शासन के पर्यावरण विभाग के निर्देशों के अनुसार बड़े तालाब के एफटीएल और उससे 50 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का नया निर्माण प्रतिबंधित है। इस क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर रोक का उद्देश्य बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र, पर्यावरणीय संतुलन और जल स्रोत की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर होगी अलग कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एफटीएल क्षेत्र में स्थित कुछ अन्य अवैध निर्माणों से जुड़े मामले वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों में न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।