भोपाल संभाग में ‘यहीं निवेश, यहीं रोजगार’ के ध्येय पर होगा औद्योगिक विकास

स्थानीय युवाओं के कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर

भोपाल, 19 अगस्त 2026। संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा ने कहा है कि भोपाल संभाग में ‘यहीं निवेश, यहीं रोजगार’ के मूल ध्येय के साथ औद्योगिक विकास को गति दी जाए। उद्योगों की स्थापना के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना प्राथमिकता हो। इसके लिए युवाओं को उद्योगों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुसार कौशल प्रशिक्षण दिया जाए।

संभागायुक्त ने बुधवार को संभागायुक्त कार्यालय में एमएसएमई, एमपीआईडीसी और उद्योग विकास की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिए। बैठक में संयुक्त आयुक्त विनोद यादव, एमपीआईडीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विशाल सिंह चौहान, एमएसएमई विभाग के संयुक्त आयुक्त अशोक श्रीवास्तव सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

औद्योगिक संभावनाओं का होगा आकलन

संभागायुक्त ने भोपाल संभाग में उपलब्ध औद्योगिक संभावनाओं और अवसरों का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए। उद्योगों की स्थापना में आने वाली व्यावहारिक दिक्कतों का संभागीय स्तर पर आपसी समन्वय से जल्द निराकरण किया जाएगा।

उन्होंने भोपाल डेवलपमेंट रीजन के लिए भविष्य की औद्योगिक योजनाओं का व्यापक रोडमैप तैयार करने को कहा। इसमें उद्योगों की जरूरत के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लस्टर आधारित विकास, कृषि, शिक्षा, एग्री-इक्विपमेंट और लॉजिस्टिक हब को शामिल किया जाएगा। बैठक में एमपीआईडीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने बताया कि आष्टा के उद्योग प्रस्ताव दिल्ली में आयोजित बैठक में प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

हर शुक्रवार औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण

संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत हर शुक्रवार संभागीय दल एक औद्योगिक क्षेत्र का मैदानी निरीक्षण करेगा। इस दौरान स्थानीय उद्योगों की वास्तविक स्थिति और उनकी समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। जिलेवार उद्योगों की समस्याओं की सूची तैयार कर उनकी लगातार मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि नए उद्योगों की स्थापना के लिए स्थानीय जरूरतों का आकलन कर निवेशकों को हरसंभव सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उद्योगों के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका से जोड़कर उनके आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

ODOP से जोड़े जाएंगे स्थानीय उद्योग

जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (DIC) को स्थानीय उद्योगों के साथ लगातार संवाद और समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। उद्योगों को स्थानीय क्षमताओं और ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ (ODOP) से जोड़ा जाएगा।

संभागायुक्त ने उद्योगों की स्थिति, उनसे मिलने वाले रोजगार, औद्योगिक विकास की सफल कहानियों और ‘स्वरोजगार से रोजगार’ के प्रेरक उदाहरणों को शामिल करते हुए एक विशेष बुकलेट प्रकाशित करने के निर्देश भी दिए।

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