भोपाल। श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक और सशक्त बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा ‘अनुगूंज’ एक दिवसीय वर्चुअल कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजन समुदाय को कानूनी सहायता, अधिकारों और शासन की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम का आयोजन जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सभागार में किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधिपति श्री विवेक रूसिया द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति श्री विशाल मिश्रा, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य एवं उच्च न्यायालय रजिस्ट्री के अधिकारी उपस्थित रहे।
भोपाल से 150 से अधिक प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़े
भोपाल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम) श्री राजर्षि श्रीवास्तव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री सुनीत अग्रवाल न्यायाधीश, तथा सामाजिक न्याय विभाग के संयुक्त निदेशक श्री राम विलास सेमिल की उपस्थिति रही।
भोपाल स्थित सामाजिक न्याय विभाग, पत्रकार कॉलोनी के सभागार से लगभग 150 श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों और संबंधित समुदाय के लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में सहभागिता की।
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम और विधिक सहायता पर दी गई जानकारी
कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016, मध्यस्थता (मीडिएशन), निःशुल्क विधिक सहायता और न्याय तक आसान पहुंच के उपायों के संबंध में जागरूक किया गया।
इसके साथ ही दिव्यांगजन के लिए जिला स्तर पर संचालित विभिन्न योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों की जानकारी भी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि विधिक जागरूकता से दिव्यांगजन अपने अधिकारों का प्रभावी उपयोग कर सकते हैं और सरकारी सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
‘अनुगूंज’ कार्यक्रम दिव्यांगजन समुदाय और न्याय व्यवस्था के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया, जिससे श्रवण एवं वाक् बाधित व्यक्तियों को आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।