भोपाल, 3 अगस्त। मध्यप्रदेश पुलिस की मानवाधिकार आधारित और जन-केंद्रित पुलिसिंग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के नेतृत्व में किए जा रहे नवाचारों को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित विश्व मानवाधिकार शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया।
सम्मेलन में मध्यप्रदेश पुलिस का प्रतिनिधित्व डीआईजी (कम्युनिटी पुलिसिंग) डॉ. विनीत कपूर ने किया। उन्होंने 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, पुलिस अधिकारियों और मानवाधिकार विशेषज्ञों के समक्ष मानवाधिकार आधारित पुलिस प्रशिक्षण, सामुदायिक पुलिसिंग और जन-केंद्रित पुलिसिंग मॉडल की जानकारी साझा की।
डॉ. कपूर ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने भारतीय संविधान की मूल भावना और मानवाधिकारों के सिद्धांतों को पुलिस प्रशिक्षण और कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाया है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग ही प्रभावी कानून-व्यवस्था और जनविश्वास की आधारशिला है।
उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस की महिला हेल्प डेस्क, शक्ति समितियां और प्रोजेक्ट सृजन जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनसे महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों तक न्याय की पहुंच मजबूत हुई है। सम्मेलन में इन पहलों को सतत विकास लक्ष्य (SDG-16) के अनुरूप प्रभावी मॉडल के रूप में सराहा गया।
डॉ. कपूर ने राज्यव्यापी नशा मुक्ति अभियान “नशे से दूरी है ज़रूरी” का भी उल्लेख किया। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने “Say No to Drugs” का संदेश देकर अभियान का समर्थन किया।
मानवाधिकार शिक्षा, पुलिस प्रशिक्षण और सामुदायिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डीआईजी डॉ. विनीत कपूर को “Human Rights Hero Award” से सम्मानित किया गया। पुलिस मुख्यालय के अनुसार यह सम्मान न केवल डॉ. कपूर के योगदान, बल्कि मध्यप्रदेश पुलिस की जन-केंद्रित और संवेदनशील कार्यशैली को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान का भी प्रतीक है।
पुलिस विभाग ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि मानवाधिकार संरक्षण, सामुदायिक पुलिसिंग और जनसहभागिता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पुलिस के प्रयासों को वैश्विक मंच पर मिली यह पहचान भविष्य में भी नवाचारों को बढ़ावा देगी।
