GeM पोर्टल से पांच साल की सरकारी खरीदी का ऑडिट कराने की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने मुख्य सचिव को भेजी शिकायत, पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति बनाने का सुझाव

भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के जरिए हुई सरकारी खरीदी की जांच कराने की मांग उठी है। कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने मुख्य सचिव को शिकायत भेजकर पिछले पांच वर्षों में सभी शासकीय विभागों में GeM पोर्टल से हुई खरीदी का विशेष ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति या विशेष जांच दल (एसटीएफ) गठित करने का सुझाव दिया है।

त्रिपाठी ने सरकारी खरीदी में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार पर आर्थिक दबाव है और वह कर्ज ले रही है। ऐसे में सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि GeM पोर्टल का उद्देश्य पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। इसलिए शिकायतों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।

दरों से लेकर सामग्री की गुणवत्ता तक जांच की मांग

शिकायत में खरीदी गई सामग्री और सेवाओं की कीमतों की बाजार दरों से तुलना करने, खरीद आदेशों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने और बार-बार एक ही विक्रेता को आदेश देने जैसे मामलों की जांच की मांग की गई है। इसके अलावा तकनीकी शर्तों के जरिए किसी खास फर्म को लाभ पहुंचाने, सामग्री की वास्तविक आपूर्ति और उसकी गुणवत्ता की भी जांच कराने को कहा गया है।

त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में अधिकारियों और कर्मचारियों के परिजनों, परिचितों या व्यावसायिक साझेदारों से जुड़ी फर्मों को अनुचित लाभ दिए जाने की आशंका है। उन्होंने विभागों के क्रय अधिकारियों, स्वीकृति देने वाले अधिकारियों, भंडार प्रभारियों और भुगतान से जुड़े कर्मचारियों के संभावित हितों के टकराव की जांच कराने की भी मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जांच पूरी होने तक सरकारी खरीदी से जुड़े डिजिटल और भौतिक दस्तावेज सुरक्षित रखे जाने चाहिए। उन्होंने भविष्य में खरीद प्रक्रिया की निगरानी मजबूत करने और जवाबदेही तय करने की भी मांग की।

त्रिपाठी के मुताबिक, यदि जांच में अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय कर सरकारी राशि की वसूली और नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से जांच शुरू करने की समय-सीमा तय करने और जांच के निष्कर्षों से शिकायतकर्ता को लिखित रूप में अवगत कराने की मांग भी की है।

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