गेहूं खरीदी में गड़बड़ी पर खाद्य मंत्री का बड़ा एक्शन, सहायक आपूर्ति अधिकारी निलंबित

सागर/भोपाल। गेहूं खरीदी प्रक्रिया में अनियमितता और किसानों के हितों से जुड़े गंभीर मामले में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सागर जिले में गेहूं उपार्जन केंद्र पर गड़बड़ी सामने आने के बाद सहायक आपूर्ति अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि जिला आपूर्ति नियंत्रक को सागर जिले के प्रभार से हटाकर भोपाल मुख्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

मामला सागर जिले के गंभीरिया स्थित लक्ष्मी नगर के श्री देव प्रभाकर हाउस में गेहूं खरीदी के दौरान सामने आई गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है। मंत्री के निर्देश पर कलेक्टर को पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है।

गेहूं की बोरियों में मिली मिट्टी, जांच के बाद कार्रवाई

प्रारंभिक जांच में वेयरहाउस में रखी कुछ गेहूं की बोरियों में भारी मात्रा में मिट्टी पाए जाने की पुष्टि हुई। मामले को किसानों के साथ धोखाधड़ी और उपार्जन व्यवस्था में गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रशासन ने जांच शुरू की।

जांच के दौरान संबंधित स्व-सहायता समूह के पदाधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया गया है। इसके साथ ही खाद्य विभाग और उपार्जन प्रक्रिया से जुड़े अन्य विभागों के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्पष्ट किया है कि किसानों की मेहनत और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गेहूं खरीदी में लापरवाही, भ्रष्टाचार या अनियमितता में शामिल किसी भी अधिकारी, कर्मचारी, संस्था या व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा।

उन्होंने कलेक्टर सागर को निर्देश दिए हैं कि उपार्जन प्रक्रिया से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए। जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

पारदर्शी खरीदी व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता

मंत्री राजपूत ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश के अन्नदाता हैं और उनकी मेहनत के साथ किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर अपराध है।

उन्होंने कहा कि उपार्जन व्यवस्था में निगरानी को और मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सरकार का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करना है।

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