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भोपाल में गेहूं खरीदी पर संकट गहराया, स्लॉट बुकिंग बंद होने से किसानों की बढ़ी चिंता

भोपाल जिले में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद हजारों किसानों की चिंता कम नहीं हुई है। एक ओर प्रशासन दावा कर रहा है कि अधिकांश उपार्जन केंद्रों पर तुलाई लगभग पूरी हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर किसानों के घरों में अब भी लाखों क्विंटल गेहूं रखा हुआ है और नई स्लॉट बुकिंग बंद होने से बेचैनी बढ़ती जा रही है। बारिश का मौसम नजदीक आने के कारण किसानों को फसल खराब होने का डर सताने लगा है।

बैरसिया के उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण

Chandrabhan Singh Jadaun ने गुरुवार को Berasia क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण किया। यह दौरा किसानों से मिल रही शिकायतों के बाद किया गया था, जिनमें केंद्रों पर लंबी कतारें, रातभर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की भीड़ और तुलाई में देरी की बात कही जा रही थी।

निरीक्षण के बाद जिला आपूर्ति अधिकारी ने कहा कि Huzur Tehsil में अधिकांश तुलाई पूरी हो चुकी है और केंद्रों पर केवल एक-दो ट्रॉलियां ही दिखाई दे रही हैं। बैरसिया क्षेत्र में भी स्थिति सामान्य बताई गई, जहां प्रतिदिन सीमित संख्या में किसान तुलाई के लिए पहुंच रहे हैं।

किसानों के घरों में रखा है लाखों क्विंटल गेहूं

हालांकि जमीनी स्थिति को लेकर किसानों की चिंता अलग तस्वीर पेश कर रही है। जिले में अभी भी बड़ी मात्रा में गेहूं किसानों के घरों और निजी गोदामों में रखा हुआ है। कई किसानों का कहना है कि पुरानी स्लॉट बुकिंग के आधार पर ही खरीदी हो रही है, जबकि नई बुकिंग बंद होने के कारण वे अपनी उपज उपार्जन केंद्रों तक नहीं पहुंचा पा रहे।

ग्रामीण क्षेत्रों में भंडारण की सीमित व्यवस्था होने के कारण अब फसल सुरक्षित रखना चुनौती बनता जा रहा है। यदि समय रहते खरीदी प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं हुई और मानसून सक्रिय हो गया, तो बड़ी मात्रा में गेहूं खराब होने का खतरा है।

केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने अतिरिक्त 20 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। अभी तक इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। माना जा रहा है कि अनुमति मिलते ही नई स्लॉट बुकिंग शुरू हो सकती है और शेष किसानों की फसल भी खरीदी केंद्रों तक पहुंच सकेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती समय प्रबंधन की है, क्योंकि मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में मई के अंतिम सप्ताह से प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो जाती है।

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