
Khandwa जिले के जनजातीय क्षेत्र में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ग्राम रोशनी में मध्यप्रदेश का पहला इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग एक्वा पार्क विकसित किया गया है। लगभग 50 एकड़ क्षेत्र में तैयार यह हाईटेक परियोजना आदिवासी महिलाओं के लिए रोजगार, प्रशिक्षण और स्थायी आय का नया मॉडल बनकर उभर रही है।
इस परियोजना को Kunwar Vijay Shah के प्रयासों से विकसित किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे जनजातीय क्षेत्रों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत होगी।
16 स्वयं सहायता समूहों की 160 महिलाएं जुड़ीं
एक्वा पार्क का संचालन 16 आदिवासी महिला स्वयं सहायता समूहों की 160 सदस्याएं करेंगी। परियोजना में आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें बायोफ्लॉक सिस्टम, रिवर्स एक्वा टैंक और केज कल्चर जैसी उन्नत व्यवस्थाएं शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक खेती की तुलना में वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन कम समय में अधिक आय देने वाला व्यवसाय बनता जा रहा है, खासकर जल संसाधन वाले ग्रामीण क्षेत्रों में।
बंगाल की तलापिया मछली से होगा उत्पादन
परियोजना में बंगाल से लाई गई तलापिया नस्ल की मछलियों का पालन किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक यह प्रजाति तेजी से बढ़ती है और 6 से 8 महीनों में एक से सवा किलो तक वजन प्राप्त कर लेती है।
एक्वा पार्क में—
14 बायोफ्लॉक टैंक
आधुनिक ग्रेडिंग सिस्टम
रिवर्स एक्वा सिस्टम
120 आधुनिक केज
स्थापित किए गए हैं। अंतिम चरण में मछलियों को आवंलिया डेम के बैकवॉटर क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, जिससे बड़े स्तर पर उत्पादन संभव होगा।
सालाना 360 टन उत्पादन का लक्ष्य
परियोजना के तहत अगले 8 से 10 महीनों में प्रतिमाह लगभग 30 टन और सालाना करीब 360 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इससे लाखों रुपये के वार्षिक कारोबार की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विपणन और कोल्ड चेन नेटवर्क मजबूत किया जाए तो यह मॉडल जनजातीय क्षेत्रों में स्वरोजगार आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है।
नीति आयोग और कई योजनाओं का समन्वय
सरकारी जानकारी के अनुसार यह परियोजना नीति आयोग और शासन की 10 अलग-अलग योजनाओं के समन्वय से विकसित की गई है। इसे “आत्मनिर्भर आदिवासी – समृद्ध मध्यप्रदेश” अभियान से भी जोड़ा जा रहा है।
Kunwar Vijay Shah ने कहा कि सरकार जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर लगातार काम कर रही है, ताकि आदिवासी समाज को मुख्यधारा की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।
महिला सशक्तिकरण का नया मॉडल
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह परियोजना केवल मत्स्य उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजातीय महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का माध्यम भी बन सकती है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, प्रबंधन और बाजार से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
Mohan Rokde के अनुसार, यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में प्रदेश के अन्य जनजातीय जिलों में भी इसी तरह के एक्वा पार्क विकसित किए जा सकते हैं।



