चंबल की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया आयाम, परशुराम जन्मस्थली जमदारा को सांस्कृतिक सर्किट में जोड़ने का सुझाव
भिंड। चंबल अंचल की सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के प्रयासों को नया समर्थन मिला है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष एवं अटेर विधायक हेमंत कटारे से प्रतिनिधि मंडल की विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें चंबल क्षेत्र की प्राचीन विरासत, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक पर्यटन विकास को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव रखे गए।
बैठक में प्रतिनिधि मंडल ने गोहद (गौ-हद धाम), श्रीकृष्ण गमन पथ योजना, चंबल अंचल की धार्मिक परंपराओं, देवस्थानी संपत्तियों, ऐतिहासिक मंदिरों और प्रस्तावित धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन सर्किट से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
जमदारा स्थित भगवान परशुराम जन्मस्थली को जोड़ने का सुझाव
चर्चा के दौरान भिंड जिले के जमदारा स्थित भगवान परशुराम जन्मस्थली धाम को भी प्रस्तावित सांस्कृतिक परिपथ में शामिल करने का सुझाव दिया गया।
हेमंत कटारे ने कहा कि चंबल क्षेत्र केवल ऐतिहासिक घटनाओं के लिए ही नहीं, बल्कि ऋषि परंपरा, सनातन संस्कृति और लोक आस्था के लिए भी महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण एवं योजनाबद्ध विकास आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि चंबल के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को एक समेकित योजना के तहत विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र पर्यटन के साथ-साथ अपनी वास्तविक सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से स्थापित कर सकेगा।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण का विषय है चंबल की विरासत
हेमंत कटारे ने कहा कि चंबल क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल जैसे गोहद, अटेर, जमदारा, दंदरौआ धाम, रावतपुरा सरकार, मितावली, पढ़ावली, काकनमठ और पीताम्बरा पीठ केवल स्थानीय आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि प्रदेश और देश की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि चंबल की विरासत को संरक्षित करने के लिए गंभीर अध्ययन, संरक्षण और योजनाबद्ध विकास की आवश्यकता है।
अभियान को मिल रहा व्यापक समर्थन
चंबल की सांस्कृतिक पहचान को लेकर चल रहे अभियान को इससे पहले संत समाज, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों, गोहद विधायक केशव देसाई और भिंड-दतिया सांसद संध्या राय का भी समर्थन मिल चुका है।
अब हेमंत कटारे के साथ हुई चर्चा को इस अभियान के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक सीमाओं से अलग विभिन्न जनप्रतिनिधियों का इस विषय पर संवाद करना चंबल की सांस्कृतिक विरासत को लेकर बढ़ती जनभागीदारी का संकेत माना जा रहा है।
प्रतिनिधि मंडल ने रखा पक्ष
बैठक में प्रतिनिधि मंडल की ओर से:
– कवि गौरव राज सोनी (तेजस्वी),
– पुखराज भटेले,
– विवेक पचौरी,
– सामाजिक कार्यकर्ता एवं धर्मप्रेमी नागरिक
उपस्थित रहे।
प्रतिनिधि मंडल ने चंबल क्षेत्र के प्राचीन धार्मिक स्थलों के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक पर्यटन विकास की आवश्यकता पर चर्चा की।
विरासत से जुड़े हैं चंबल के भविष्य के अवसर
गौ-हद धाम से लेकर जमदारा स्थित परशुराम जन्मस्थली तक, श्रीकृष्ण परंपरा से जुड़ी मान्यताओं और प्राचीन स्थापत्य धरोहरों तक चंबल अंचल की पहचान बहुआयामी रही है।
क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और विकास न केवल अतीत को सहेजने का प्रयास है, बल्कि भविष्य में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय विकास की संभावनाओं को भी मजबूत कर सकता है।