नगर निगम मुख्यालय का टूटा कांच का दरवाजा बना प्रशासनिक सुस्ती का प्रतीक, 6 दिन बाद भी नहीं हुआ सुधार

भोपाल, 11 जून। राजधानी भोपाल स्थित नगर निगम मुख्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगा कांच का दरवाजा टूटने के छह दिन बाद भी नहीं बदला जा सका है। 5 जून को आए तेज आंधी-तूफान और बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ यह दरवाजा अब तक अपनी जगह से गायब है, जिससे निगम मुख्यालय की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुख्यालय में खुलेपन से बढ़ी परेशानी
नगर निगम मुख्यालय का यह कांच का दरवाजा भवन के मुख्य प्रवेश मार्ग का हिस्सा है। दरवाजा नहीं होने के कारण भवन का प्रवेश क्षेत्र लगातार खुला रह रहा है। वर्तमान में शहर में बढ़ती गर्मी और लू के चलते इसका सीधा असर कार्यालयीन वातावरण पर पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि गर्म हवाएं सीधे अंदर तक पहुंच रही हैं, जिससे कार्य करना असुविधाजनक हो गया है।
छोटी मरम्मत भी फाइलों में उलझी
मुख्यालय में मौजूद कर्मचारियों के अनुसार दरवाजे की मरम्मत या नए कांच लगाने की प्रक्रिया अभी प्रशासनिक मंजूरियों के चरण में है। संबंधित फाइल तैयार कर दी गई है, लेकिन स्वीकृति और बजट मंजूरी मिलने के बाद ही नया कांच खरीदा जा सकेगा। इसके बाद दरवाजा लगाने की कार्रवाई होगी।
यह स्थिति इसलिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि जिस भवन से पूरे शहर के विकास, रखरखाव और जनसुविधाओं से जुड़े निर्णय लिए जाते हैं, वहीं एक सामान्य मरम्मत कार्य भी कई दिनों तक लंबित पड़ा है।
कर्मचारियों पर पड़ रहा असर
गर्मी के मौसम में खुले प्रवेश द्वार के कारण धूल और गर्म हवा कार्यालय परिसर में प्रवेश कर रही है। कर्मचारियों का कहना है कि दोपहर के समय स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है। एयर कंडीशनिंग और कूलिंग व्यवस्था की प्रभावशीलता भी प्रभावित हो रही है, जिससे ऊर्जा की अतिरिक्त खपत होने की संभावना है।
व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
निगम मुख्यालय में टूटा हुआ दरवाजा केवल एक मरम्मत कार्य का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गति को भी दर्शाता है। आम नागरिकों की शिकायतों और विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का दावा करने वाले विभाग के अपने मुख्यालय में बुनियादी मरम्मत कार्य का छह दिन तक लंबित रहना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय कर्मचारियों और आगंतुकों का मानना है कि मुख्यालय जैसी महत्वपूर्ण इमारत में आवश्यक मरम्मत कार्यों के लिए त्वरित व्यवस्था और आकस्मिक निधि की उपलब्धता होनी चाहिए, ताकि छोटी-छोटी समस्याएं लंबे समय तक बनी न रहें।



